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भोजपुर की बहुजन महापंचायत में शामिल नहीं होंगे उपेंद्र कुशवाहा! जीतन राम मांझी के ऐलान के बीच रालोमो नेता ने दी नसीहत

On: July 1, 2026 4:41 AM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। जहां एक ओर मामले की जांच न्यायिक आयोग कर रहा है। वहीं, दूसरी ओर इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक मंच सक्रिय हो गए। इस वर्ष 24 जून को भरत तिवारी के समर्थन में बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत के बाद अब 5 जुलाई को जगदीशपुर में बहुजन महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है। इस मामले की गूंज अब बिहार की राजनीति से निकलकर धार्मिक और सामाजिक मंचों तक पहुंच गई है। नेताओं और सामाजिक संगठनों के बाद अब प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य व बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री यानी बाबा बागेश्वर ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। लोक गायक से भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता बने खेसारी लाल यादव भी बलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी के स्वजन से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त कर जा चुके हैं और नेताओं का दौरा लगातार जारी है।

जगदीशपुर के लाल बिहारी सिंह टोला हाईस्कूल मैदान में प्रस्तावित इस बहुजन महापंचायत को भरत तिवारी समर्थक महापंचायत के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य बहुजन समाज को एकजुट करना और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व को मजबूत करना है। इस आयोजन की राजनीतिक अहमियत तब और बढ़ गई, जब एनडीए समर्थित हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्यूलर) यानी हम के संरक्षक व नमो सरकार के केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के मंत्री जीतन राम मांझी ने इसमें शामिल होने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ’एक्स’ पर अपने पोस्ट में लिखा, ’देश की जनता करें पुकार, बहुजन एकता अबकी बार’ के नारे के साथ वह 5 जुलाई को आरा पहुंचेंगे और जगदीशपुर में आयोजित बहुजन महापंचायत में भाग लेंगे। वैसे, भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर जीतन राम मांझी पहले भी खुलकर सम्राट सरकार के पक्ष में खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा था कि दलित के एनकाउंटर पर लोग उसे नक्सली और मुसलमान के एनकाउंटर पर आतंकवादी बताने में देर नहीं करते। लेकिन, भरत तिवारी के मामले में वही लोग पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भरत तिवारी के पास अवैध पिस्टल कहां से आई और किन लोगों के संरक्षण में इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि देश संविधान से चलेगा, न कि अवैध हथियारों के दम पर। उनके अनुसार, भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था। बल्कि, उसके खिलाफ पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज थे।

उधर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसाभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने इस मामले में संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही तथ्यों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने से पहले किसी भी तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। महापंचायतों के आयोजन पर प्रतिक्रिया देते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन, यदि किसी के पास इस मामले से जुड़े तथ्य या शिकायत हैं तो उन्हें न्यायिक आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। ताकि, निष्पक्ष जांच के आधार पर सच्चाई सामने आ सके।

दूसरी ओर बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इस मामले में अब तक 5 पुलिसकर्मियों पर गाज गिर चुकी है। इनमें तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार, पुलिस अवर निरीक्षक हरश्चिंद्र कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक अंकित आर्यन, पुलिस अवर निरीक्षक रामाशंकर यादव व महिला सिपाही मीरा कुमारी शामिल हैं। वहीं, सरकार ने जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को लाइन हाजिर कर दिया है। मानवाधिकार आयोग भी इस मामले की पड़ताल कर रहा है। वहीं, अब राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। भरत तिवारी एनकाउंटर पर गुरुवार यानी 25 जून को सम्राट चौधरी ने बयान दिया है। राजधानी पटना स्थित ज्ञान भवन में आयोजित ’संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भोजपुर की घटना पर सरकार ने तुरंत न्यायिक जांच कमीशन का गठन किया। ताकि, न्याय जल्दी मिले। उन्होंने कहा कि अगर कोई गलत किया है तो उसपर कार्रवाई होगी। इस कार्यक्रम में नमो सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा भी मौजूद थे। बता दें कि, इससे पूर्व सम्राट चौधरी 25 जून को ही जमुई भी पहुंचे थे। जहां उन्होंने मीडिया के भरत तिवारी से जुड़े सवालों पर चुप्पी साध रखी थी। वह हाथ जोड़कर निकल गए थे। हालांकि, अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि जो भी गलत होगा, उसपर कार्रवाई होगी। वहीं, अब भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भरत तिवारी को कुल 5 गोलियां लगी थीं। सभी गोलियां शरीर के निचले हिस्से यानी दोनों जांघों और एक पैर में लगीं। रिपोर्ट सामने आने के बाद एक बार फिर पूरे मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने से लगी थी। दूसरी गोली बाईं जांघ के बीच वाले हिस्से के अंदर की ओर लगी। तीसरी गोली दाईं जांघ के बीच वाले हिस्से के अंदर की तरफ लगी है और चौथी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से में मिली है। वहीं, पांचवीं गोली बाएं पैर के बीच वाले हिस्से में पीछे से लगी थी। रिपोर्ट में सभी गोलियों के शरीर के निचले हिस्से में लगने की पुष्टि हुई है। इस बीच भोजपुर पुलिस ने भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को बड़ी राहत दी है। दोनों का नाम एफआईआर से हटा दिया गया है। पहले उन पर हथियार रखने और भरत तिवारी को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। मामले की न्यायिक जांच भी शुरू हो चुकी है। 25 जून को ही न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष एवं पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा अपनी टीम के साथ भरत तिवारी के गांव बिलौटी पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने भरत के परिजनों से भी मिले और बातचीत की। इस दौरान भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया, पुलिस अधीक्षक राज व शाहाबाद रेंज के डीआईजी सत्य प्रकाश भी मौजूद रहे।

बता दें कि, 17 जून 2026 को भरत तिवारी फेसबुक लाइव पर आया था। उसने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस के सामने सरेंडर करने की बात कही थी। पुलिस का दावा है कि सरेंडर के बाद उसने दोबारा हथियार उठाकर फायरिंग की कोशिश की। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। बाद में परिजनों ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। भरत की मां आशा देवी ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में जगदीशपुर एसडीपीओ, शाहपुर थानाध्यक्ष व अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया जा चुका है। वहीं, भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर अधिवक्ता मुकेश कुमार ने भी पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका (पीआईएल) दायर की है। अधिवक्ता मुकेश कुमार ने इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ के समक्ष गुहार लगाई है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायिक जांच के बाद पूरे मामले पर सबकी नजर टिकी हुई है।

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