बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार पुलिस अब विधि-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण जैसे मामलों में असाल्ट हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगी। बिहार के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी विनय कुमार के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को इस संबंध में फिर से निर्देश जारी किया है। एके-47, इंसास व एसएलआर जैसे आटोमेटिक और सेमी-आटोमेटिक हथियारों का इस्तेमाल केवल उग्रवाद, आतंकवाद व दुर्दांत अपराध से जुड़े मामलों में किया जाएगा। राजधानी पटना में बुधवार यानी 12 अगस्त को एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि विधि-व्यवस्था से जुड़े मामलों में असाल्ट हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है।
पुलिसकर्मियों को परिस्थिति के अनुरूप निर्धारित हथियारों के साथ ही ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने को कहा है। ’बिहार बंद’ के दौरान सिवान में एक सिपाही द्वारा एके-47 से हवाई फायरिंग किए जाने के मामले में भी पुलिस मुख्यालय ने कार्रवाई की है। एडीजी सुनील कुमार ने बताया कि फायरिंग के लिए किसी स्तर से कोई आदेश नहीं दिया गया था। एके-47 से फायरिंग करने वाले सिपाही अभिषेक कुमार पटेल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सिपाही के निलंबन के बाद उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों के विपरीत असाल्ट हथियारों के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया जाएगा। पुलिसकर्मियों को हथियारों के इस्तेमाल संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। पुलिस मुख्यालय पहले भी आम जनता के बीच हथियारों के प्रदर्शन को लेकर निर्देश जारी कर चुका है। पुलिस पदाधिकारियों और गश्ती दलों को आम लोगों के बीच छोटे हथियार लेकर जाने को कहा गया था। इसके पीछे उद्देश्य पुलिस की मौजूदगी के दौरान अनावश्यक भय का माहौल बनने से रोकना था। मुख्यालय के मुताबकि, छोटे हथियारों को संभालना अपेक्षाकृत आसान होता है और इनके साथ पुलिस की मौजूदगी आम लोगों के बीच कम भय पैदा करती है। वहीं, अत्याधुनिक असाल्ट हथियारों का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों तक सीमित रखने की नीति तय की गई है। इससे विधि-व्यवस्था ड्यूटी और विशेष अभियानों के लिए हथियारों के इस्तेमाल की सीमा स्पष्ट होगी।











