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बिहार में रग्बी खिलाड़ी के तौर पर मैदान में दूसरी लड़की उतरी, नौकरी व सम्मान संघ के सचिव की पत्नी वंदना कुमारी को मिला

On: August 15, 2026 5:43 PM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में खेल कोटे और खेल सम्मान से जुड़े रग्बी के मामलों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण यानी बीएसएसए की जांच में एक के बाद एक सामने आए दो मामलों में फर्जी तरीके से राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि हासिल करने और उसके आधार पर सरकारी लाभ लेने के आरोप लगे हैं। सूबे में ताजा मामला रग्बी फुटबॉल संघ ऑफ बिहार के सचिव पंकज ज्योति की पत्नी वंदना कुमारी से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 2019 की नेशनल रग्बी चौंपियनशिप में वंदना कुमारी खुद मैदान पर नहीं उतरीं। बल्कि, उनकी जगह किसी दूसरी खिलाड़ी ने मैच खेला। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उन्हें विजेता टीम की सदस्य बताया गया और इसी आधार पर उन्हें खेल सम्मान योजना, 2021 के तहत 33,333 रुपये की राशि भी दी गई। रग्बी चौंपियनशिप के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का बीएसएसए की जांच में खुलासा हुआ है। अब बीएसएसए ने राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।

बिहार की राजधानी पटना में 19 से 21 जुलाई 2019 के बीच पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में सीनियर वीमेंस नेशनल रग्बी सेवेन्स चौंपियनशिप हुई थी। जहां बिहार की महिला टीम ने इसमें स्वर्ण पदक जीता था। टीम की सूची में जर्सी नंबर 12 के सामने वंदना कुमारी का नाम दर्ज था। बीएसएसए की जांच में रग्बी इंडिया से मिले वीडियो फुटेज और तस्वीरों की पड़ताल की गई। जांच में दावा किया गया कि जर्सी नंबर 12 पहनकर पूरे टूर्नामेंट में कोई दूसरी खिलाड़ी खेल रही थी। फाइनल के बाद जर्सी नंबर 12 वाली खिलाड़ी टीम के साथ जश्न में शामिल हुई। लेकिन, पुरस्कार वितरण के वक्त ड्रेसिंग रूम की ओर चली गई। इसके बाद सामान्य कपड़ों में वंदना कुमारी टीम के बीच नजर आईं। मेडल वितरण के दौरान 11 खिलाड़ियों को ही मेडल पहनाया गया। जबकि, शील्ड लेने के वक्त वंदना कुमारी आगे पहुंचीं। जांच कमिटी ने वीडियो फुटेज को इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है। बिहार रग्बी एसोसिएशन के सचिव की पत्नी वंदना कुमारी पर संगीन आरोप लगे हैं।

इतना ही नहीं, रग्बी नेशनल चौंपियन विजेता टीम की सदस्य होने के आधार पर वंदना कुमारी को खेल सम्मान योजना, 2021 के तहत 33,333 रुपये की सम्मान राशि भी दी गई थी। बीएसएसए की जांच में फर्जीवाड़े का आरोप सामने आने के बाद अब इस राशि की वसूली की सिफारिश की गई है। बीएसएसए ने संबंधित विभाग को अनुचित तरीके से मिले लाभ को रद्द करने और सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करने को कहा है। वंदना कुमारी वर्तमान में भवन निर्माण विभाग में कार्यरत हैं। आरोप है कि खेल उपलब्धि से जुड़े प्रमाण पत्र का इस्तेमाल सरकारी नौकरी में खेल कोटे के लाभ के लिए किया गया। बीएसएसए ने भवन निर्माण विभाग के सचिव को पत्र भेजकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है। हालांकि, नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया और इसमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की अंतिम स्थिति संबंधित विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

वंदना कुमारी ने 5 दिसंबर 2024 को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ योजना 2024’ के तहत ड्रैगन बोट स्पर्धा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने अप्रैल 2023 में मोतिहारी में हुई नेशनल चौंपियनशिप और अगस्त 2023 में थाइलैंड के रायोंग-पटाया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ड्रैगन बोट प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया था। भवन निर्माण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए वंदना कुमारी ने विभाग से पूर्व अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया था। थाइलैंड यात्रा के लिए स्वीकृत अवकाश भी निजी विदेश यात्रा के नाम पर था। वंदना कुमारी के पतिदेव पंकज ज्योति के अंतरराष्ट्रीय ड्रैगन बोट रेस ऑफिशियल होने की बात भी सामने आई है। मामले में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक-सह-सीईओ रविंद्रन शंकरण ने पटना स्थित कंकड़बाग थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पटना के एसएसपी को पत्र भेजा है। प्राधिकरण ने संबंधित विभागों को पत्र भेजकर अनुचित तरीके से प्राप्त लाभ रद्द करने, 33,333 रुपये की वसूली करने और सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।

रग्बी से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत खेल कोटे से सरकारी नौकरी पाने वाले रग्बी खिलाड़ी सुधांशु रंजन को जुलाई 2026 में निलंबित किया गया था। वह नालंदा के हिलसा अनुमंडल कार्यालय में निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर कार्यरत थे। उन पर गलत तथ्यों और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप लगा था। बीएसएसए की जांच में दावा किया गया कि सुधांशु रंजन ने ‘बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुकित नियमावली 2025’ के प्रावधानों का पालन नहीं किया और विभाग को गलत जानकारी देकर नौकरी हासिल की। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। एक ओर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खिलाड़ी की जगह किसी दूसरे के खेलने का आरोप है, तो दूसरी ओर खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने खेल प्रमाण-पत्रों के सत्यापन और खेल कोटे से होने वाली सरकारी नियुक्तियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब वंदना कुमारी मामले में पुलिस और संबंधित विभागों की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल था और सरकारी लाभ हासिल करने की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है। 

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