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“E-Prisons Early Release Processing Module” का शुभारम्भ

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उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग द्वारा बंदियों के समयपूर्व रिहाई प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण हेतु विकसित “E-Prisons Early Release Processing Module” का आज दिनांक 27 मई, 2026 को औपचारिक शुभारम्भ किया गया। यह पहल उत्तर प्रदेश कारागार विभाग द्वारा न्यायिक एवं सुधारात्मक प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कदम है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा समयपूर्व रिहाई प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं तकनीक-आधारित बनाए जाने के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC), नई दिल्ली के साथ सतत समन्वय स्थापित कर इस डिजिटल मॉड्यूल को विकसित कराया गया है। विभागीय अधिकारियों द्वारा निरंतर तकनीकी परामर्श, परीक्षण, फीडबैक एवं प्रक्रियात्मक सुधार सुनिश्चित किए गए, जिसके परिणामस्वरूप यह मॉड्यूल आज सफलतापूर्वक प्रारम्भ किया गया है।

इस अवसर पर आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं संरक्षक-प्रमुख, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा “E-Prisons Early Release Processing Module” का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी , न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय एवं अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC), संरक्षक-प्रमुख, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA), कार्यकारी अध्यक्षगण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, माननीय अध्यक्षगण, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समितियाँ (HCLSCs) तथा सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में महानिदेशक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश, पी.सी. मीना , उप महानिरीक्षक कारागार (मुख्यालय), पी.एन. पाण्डेय , वरिष्ठ अधीक्षक, केंद्रीय कारागार आगरा एवं वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार लखनऊ सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता की।

उक्त मॉड्यूल को वर्तमान में पायलट परियोजना के रूप में केंद्रीय कारागार, आगरा एवं जिला कारागार, लखनऊ में लागू किया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से पात्र बंदियों की पहचान, समयपूर्व रिहाई प्रस्तावों का ऑनलाइन प्रेषण, विभिन्न स्तरों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग, विभागीय समन्वय तथा समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे प्रस्तावों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब में कमी आएगी तथा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनेगी।

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