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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 2026: बिहार के उपचुनाव में भाजपा का अचानक यू-टर्न! अभिषेक बंटी को बिठाकर भारी फजीहत से बच गई भाजपा, अब नीरज कुमार सिन्हा को चुनावी दंगल में उतारा

On: July 11, 2026 1:36 PM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार की सबसे चर्चित हो चुकी बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा द्वारा प्रत्याशी बदलने के फैसले के बाद राजनीतिक चर्चायें तेज हो गई हैं। एनडीए समर्थित भाजपा ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी को प्रत्याशी बनाया था। हालांकि, नामांकन के दूसरे दिन ही उन्होंने उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर लिया। इसके बाद भाजपा ने उनकी जगह नीरज कुमार सिन्हा को चुनावी मैदान में उतार दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। विपक्षी दल भी इसे मुद्दा बनाकर भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं। जन सुराज पार्टी यानी जसुपा से जुड़े नेताओं का दावा है कि उनके पास अभिषेक बंटी से जुड़े कुछ दस्तावेज मौजूद थे। जिसकी भनक भाजपा को लग गई और उसने जल्द प्रत्याशी बदल दिया।

जसुपा नेताओं के मुताबिक, इन दस्तावेजों को नामांकन जांच के दौरान पेश करने की तैयारी थी। नामाकन पत्रों की जांच के दौरान जसुपा इसे निर्वाची अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह के समक्ष पेश करने की तैयारी कर रही थी। ऐसा होने पर अभिषेक बंटी की उम्मीदवारी खारिज हो सकती थी। हालांकि, माता-पिता पर दर्ज मुकदमों का जिक्र प्रत्याशी के शपथ पत्र में नहीं होता है। लेकिन, अभिषेक बंटी के मामले में इसका राजनीतिक उपयोग किया जा सकता था। उनके पिता रवींद्र प्रसाद का नाम बहुचर्चित चारा घोटाला में आया था। वे इस कांड में चार्जशीटेड भी थे। यही वह चारा घोटाला है, जिसने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सत्ता से बेदखल कर दिया है।

वैसे, सूबे बिहार के इस बहुचर्चित चारा घोटाला को उजागरण करने में भाजपा की बड़ी भूमिका थी। जसुपा कोर कमिटी के सदस्य एवं पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना के मुताबिक, अभिषेक बंटी पर महिला उत्पीड़न का भी आरोप है। उनके मुताबिक, शराबबंदी कानून के तहत भी अभिषेक बंटी पुलिस थाना का चक्कर लगा चुके हैं। हालांकि, इन दावों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है। राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर इस घटनाक्रम की अलग व्याख्या कर रहे हैं।

उधर, भाजपा ने प्रत्याशी बदलने के फैसले पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक चर्चाओं के दौरान अभिषेक बंटी और उनके परिवार से जुड़े पुराने मामलों का भी जिक्र किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं ने कुछ मामलों और आरोपों को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अभिषेक बंटी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में ऐसे मुद्दे अक्सर चर्चा का केंद्र बन जाते हैं। इसी वजह से प्रत्याशी बदलने के फैसले को कई लोग राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, इन दावों व आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

हालांकि, अभिषेक बंटी ने बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को लिखे पत्र में चुनाव मैदान से बाहर होने का कारण व्यक्तिगत बताया है। लेकिन, यह कारण किसी को स्वीकार नहीं हो रहा है। क्योंकि, उनके परिवार में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है, जिसके कारण जीत की गारंटी वाली बांकीपुर विधानसभा सीट से वह अपना नाम वापस ले लें। वह भी उपचुनाव में। भाजपा ने अब अभिषेक बंटी की जगह युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा को एनडीए प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के भीतर उनकी छवि एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में मानी जाती है। वे लम्बे समय से भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रत्याशी बदलने का फैसला सोच-समझकर लिया गया है। अब भाजपा नए चेहरे के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी है।

दूसरी ओर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद सियासत गर्म हो गई है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे पर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अब तक देश में लोग भाजपा के डर से पीछे हटते रहे हैं। लेकिन, यह पहली बार हुआ है जब भाजपा का ही प्रत्याशी चुनावी मैदान से हट गया। प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। बांकीपुर का उपचुनाव अब और ज्यादा दिलचस्प होता नजर आ रहा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि जन बल के आगे कोई भी ताकत टिक नहीं सकती है। उनका दावा था कि जनता की ताकत सबसे बड़ी होती है और वही अंतिम फैसला करती है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की ताकत और जनता के विश्वास की जीत है। पीके ने इसे एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी पेश किया। उन्होंने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और उसे अपनी आवाज मिल रही है। इसी वजह से राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। बांकीपुर उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक दल इसे बिहार की भावी राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। प्रशांत किशोर खुद पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला और भी रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब चुनाव प्रचार और जन समर्थन पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में बांकीपुर की सियासत और गर्म होने के संकेत हैं।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को बिहार की राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इस सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी चुनावी मैदान में डटे हैं। जबकि, राजद से रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता दूसरी बार मैदान में हैं। ऐसे में भाजपा ने सुधार कर एक बार फिर अनुभवी राजनीतिक रणनीतिकार के मुकाबले संगठन के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता को उतारकर अलग संदेश देने की कोशिश की है। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई है। भाजपा ने उनके करीबी माने जाने वाले अभिषेक बंटी की जगह अब युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया है। वैसे, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। एनडीए समर्थित भाजपा जहां अपनी परंपरागत सीट बचाने की कोशिश में है। वहीं, विपक्षी महागठबंधन समर्थित राजद व नए राजनीतिक चेहरे इस सीट पर सेंध लगाने की तैयारी में हैं। अब देखने वाली बात होगी कि बांकीपुर विधनसभा क्षेत्र की जनता इस बार किसके पक्ष में फैसला सुनाती है। यह तो वक्त आने पर ही पता चल सकता है।

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