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बिहार में अवैध नर्सिंग होम पर लगेगी लगाम, सभी छोटे-बड़े प्राइवेट हॉस्पिटलों का रजिस्ट्रेशन हुआ अब अनिवार्य

On: July 6, 2026 12:13 PM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में बिना पंजीकरण संचालित हो रहे नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिक और छोटे-बड़े प्राइवेट हॉस्पिटलों पर अब सख्ती से कार्रवाई होगी। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य प्रतिष्ठान (स्थापना एवं पंजीकरण) नियमावली-2026 को लेकर पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने पर बिहार भर में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिक और प्राइवेट हॉस्पिटलों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

भोजपुर जिले के बड़हरा थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजीव रॉय की एकलपीठ ने उक्त टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान एक कथित हॉस्पिटल की जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसमें पाया गया कि वह महज दो कमरों में संचालित हो रहा था और हॉस्पिटल के न्यूनतम मानकों पर भी खरा नहीं उतरता था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सरकारी अधिवक्ता (जीपी-2) प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को बताया कि स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना के तहत 1 से 40 बेड तक की क्षमता वाले सभी प्राइवेट हॉस्पिटलों, नर्सिंग होम एवं क्लीनिकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि नियमावली का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर संतोष व्यक्त करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार की पहल और सरकारी अधिवक्ता के सहयोग की सराहना की तथा अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

नई नियमावली के मुताबिक, जिला स्तर पर सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला पंजीकरण प्राधिकरण का गठन किया गया है। वहीं, सामान्य प्रावधानों के उल्लंघन पर पहली बार 10 हजार, दूसरी बार 25 हजार तथा इसके बाद प्रत्येक उल्लंघन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बिना पंजीकरण स्वास्थ्य प्रतिष्ठान संचालित करने पर भी क्रमशः 10 हजार और 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में प्रतिष्ठान को सील कर भारतीय न्याय संहिता के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान गलत सूचना देने, जानकारी छिपाने अथवा जांच में बाधा पहुंचाने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने पंजीकरण प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। इच्छुक स्वास्थ्य प्रतिष्ठान 500 रुपये शुल्क के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के 15 दिनों के अंदर एक वर्ष के लिए अस्थायी पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा, जिसे अधिकतम दो बार नवीनीकृत कराया जा सकेगा। इस अवधि के अंदर संस्थानों को स्थाई पंजीकरण के लिए निर्धारित मानकों का अनुपालन करना जरूरी होगा।

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