बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में नई एनडीए सरकार हर क्षेत्र में बदलाव करना चाह रही है। राज्य के उच्च शिक्षा व्यवस्था में भी जल्द बदल हो सकती है। सूबे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली वर्तमान एनडीए सरकार 18वीं बिहार विधानसभा के पहले मानसून सत्र में एक नया उच्च शिक्षा विधेयक लाने की तैयारी में जुटी है। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य के डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की व्यवस्था अलग-अलग होगी। साथ ही, शिक्षकों के लिए भी कई नए नियम लागू किए जाएंगे। नए विधेयक में कॉलेज शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। अगर यह नया कानून लागू होता है तो कॉलेज शिक्षक किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन, प्रचार या लेखन नहीं कर सकेंगे।
राज्य सरकार का प्रस्ताव है कि सूबे बिहार के करीब 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन किया जाये। अभी ये कॉलेज राज्य के 12 विश्वविद्यालयों के तहत संचालित होते हैं। नया कानून लागू होने के बाद इनका संचालन, प्रशासन और अन्य फैसले सीधे उच्च विभाग करेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों की भूमिका मुख्य रूप से स्नातकोत्तर यानी पीजी शिक्षा और शोध तक सीमित रहेगी। वहीं, स्नातक (यूजी) कॉलेजों का पूरा प्रबंधन राज्य सरकार के अधीन होगा। प्रस्तावित नए कानून के मुताबिक, शिक्षकों की नियुक्ति, तबादला, पदोन्नति व सेवा से जुड़े फैसले अब विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग करेगा। इसके लिए पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में भी संशोधन की तैयारी है।
सरकार सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, अब नेट और पीजी डिग्री न्यूनतम योग्यता होगी। पीएचडी को अनिवार्य योग्यता से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नहीं बन सकेंगे। अभी तक अनुभव और पदोन्नति के आधार पर यह अवसर मिलता था। लेकिन, नया कानून लागू होने पर यह व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
सरकार हर जिले में एक उच्च शिक्षा पदाधिकारी तैनात करने की भी तैयारी कर रही है। यह पदाधिकारी जिले के सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों की पढ़ाई, प्रशासन व अन्य गतिविधियों की निगरानी करेगा। अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। कॉलेजों का संचालन सीधे राज्य सरकार के हाथ में होगा और शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर प्रशासन तक की पूरी व्यवस्था नए नियमों के तहत चलेगी।










