बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में समस्तीपुर जिले के ताजपुर निवासी देश के चर्चित युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 मुकाबले में तूफानी बल्लेबाजी करते हुए महज 18 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। 15 वर्ष 118 दिन की उम्र में उन्होंने 19 गेंदों पर 50 रन बनाए। उनकी पारी में 4 छक्के और 4 चौके शामिल रहे। अर्धशतक पूरा करने के तुरंत बाद अगली गेंद पर वह आउट हो गए। वैभव सूर्यवंशी ने इस धमाकेदार पारी के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उन्होंने देश के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। सचिन तेंदुलकर ने 16 वर्ष 213 दिन की उम्र में वर्ष 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाया था। टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ही सबसे तेज अर्धशतक नेपाल के दीपेंद्र सिंह ऐरी ने महज 9 गेंदों में मंगोलिया के खिलाफ 2023 में बनाया था। वहीं, सबसे कम उम्र में टी-20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक भारत के वैभव सूर्यवंशी ने 19 गेंदों में 50 रन बनाकर जुलाई 2026 में अपने नाम किया है।
इंग्लैंड के खिलाफ पिछली तीन मैचों की सीरीज में वैभव सूर्यवंशी का बल्ला नहीं चला था। उन्होंने क्रमशः 14, 13 और 15 रन की पारियां खेली थीं। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने आक्रामक अंदाज में वापसी की और 263 के स्ट्राइक रेट से 50 रन ठोक दिए। उनकी विस्फोटक पारी ने भारतीय पारी को तेज शुरुआत दी। भारत के लक्ष्य का पीछा करने के दौरान वैभव सूर्यवंशी ने तेज शुरुआत दिलाई। जबकि, बिहार की राजधानी पटना के इशान किशन ने 24 गेंदों में 3 चौके और 2 छक्कों की मदद से 35 रन बनाए। दोनों की पारियों की बदौलत भारत ने जिम्बाब्वे के 126 रन के लक्ष्य को महज 13.2 ओवर में हासिल कर लिया।

वैभव सूर्यवंशी की उपलब्धि ने उन्हें क्रिकेट के सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर पहुंचा दिया। भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने 16 वर्ष 213 दिन, शाहिद अफरीदी ने 16 वर्ष 214 दिन और मुश्ताक मोहम्मद ने 17 वर्ष 39 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाया था। अब वैभव सूर्यवंशी ने महज 15 वर्ष 118 दिन की उम्र में यह कारनामा कर इतिहास रच दिया है। वैभव सूर्यवंशी के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद ताजपुर स्थित उनके पैतृक आवास पर बधाई देने वाले शुभचिंतकों व खेल प्रेमियों का जमावड़ा लगा रहा। बचपन के कोच ब्रजेश झा ने खुशी जताते हुए कहा कि यह तो बस शुरुआत है, आगे वैभव सूर्यवंशी और भी कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम करेगा। इस सफलता से समस्तीपुर सहित पूरे बिहार में जश्न का माहौल है।

देश के चर्चित युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की सफलता की कहानी केवल एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उसके परिवार के त्याग, समर्पण और वर्षों की मेहनत की भी है। वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी खुद भी समस्तीपुर के क्रिकेटर रहे हैं। वह राज्य व देश के लिए तो नहीं खेल सके, इसका उन्हें मलाल जरूर है। लेकिन पुत्र वैभव सूर्यवंशी को देश का क्रिकेटर बना दिया है, इसकी खुशी जरूर है। वैभव सूर्यवंशी की सफलता में मां आरती कुमारी का भी बड़ा योगदान है। वह छोटे पुत्र आकाश सूर्यवंशी को भी क्रिकेटर बनाने की तैयारी में हैं। संजीव सूर्यवंशी ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन देखकर मुझे आशा थी कि वो एक दिन देश के लिए खेलेगा। इतनी जल्दी टीम इडिया में अपनी जगह बना लेगा, ये नहीं सोचा था। संजीव सूर्यवंशी ने कहा कि वैभव ने बहुत परिश्रम किया, मेहनत का उसे फल मिला। मैं अपना सबकुछ दांव पर लगा पुत्र के पीछे लग गया। उसने उसे सूध सहित लौटा दिया। जब वह 5 वर्ष का था तो उसे बैट-बाल थमाया। 9 वर्ष की उम्र में स्थानीय स्तर पर टूर्नामेंट खेलने लगा। शुरुआती दिनों से लाल गेंदों से खेलना शुरू किया। जब हम 50 की सोचते थे, वो 100 रन बना देता था। एक सत्र में 40-50 शतक मारता था। बचपन से खुद को दिखाना चाह रहा था कि वो अलग है। 50 ओवर के मैच में 332 रन बनाकर उसने सबका ध्यान खींचा था। उन्होंने बताया कि आईपीएल खत्म होने के बाद मैंने उससे पूछा कि तुम बुमराह, मिचेल स्टार्क, हेजलवुड जैसे गेंदबाजों को इतनी आसानी से कैसे मार लेते हो, उसने जवाब दिया मेरे लिए ये कोई मुश्किल नहीं है। संजीव सूर्यवंशी ने वैभव सूर्यवंशी की तरह अन्य बच्चों में क्रिकेटर बनने की ललक पर उदाहरण देते हुए कहा कि मेरा छोटा पुत्र आकाश क्रिकेट खेलता है, पर वैभव जैसा नहीं। किसी की नकल न करें, अपनी तरह बनें। कामयाबी जरूर मिलेगी।











