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बिहार में बाढ़ के बीच सम्राट सरकार का मेगा प्लान, प्रभारी मंत्री-सचिव 13 जिलों में करेंगे कैंप, पटना के तटबंधों पर खास नजर, बाढ़ राहत के लिए आपदा प्रबंधन विभाग मुस्तैद

On: September 9, 2026 4:10 AM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गंगा, गंडक, सोन, पुनपुन, सरयू, महानंदा व कोसी नदियों के जलस्तर में लगातार उफान से निचले इलाकों में पानी फैल गया है। कई जगह घरों, सड़कों और संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी पहुंच गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी और तेज करने का निर्णय लिया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंगा के तटवर्ती 13 जिलों में राहत-बचाव कार्यों की निगरानी के लिए प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिवों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री स्रमाट चौधरी ने कहा है कि संबंधित प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और आवश्यकता के अनुसार वहीं कैंप कर राहत एवं बचाव कार्यों का गहन पर्यवेक्षण करेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश के तहत पटना, भोजपुर, बक्सर, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार सहित गंगा तटवर्ती जिलों में विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति का जाएजा लेने और राहत कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं रहने देने को कहा गया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, भोजन, पेयजल और आवश्यक सहायता समय पर पहुंचाई जाए। जलस्तर में वृद्धि के कारण संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पटना शहरी क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। पटना शहरी सुरक्षा तटबंध के आसपास के इलाकों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और तटबंधों एवं संवेदनशील स्थानों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। बढ़ते जलस्तर के बीच प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिवों के जिलों में कैंप करने से राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी सीधे उच्च स्तर से होगी। स्थानीय प्रशासन को भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।

उधर, बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ राहत कार्य में जुटा हुआ है। प्रभावित आबादी को तत्काल सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यभर में कई त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 432 सामुदायिक रसोई केंद्र चलाए जा रहे हैं, जहां अब तक 9.41 लाख से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है। इसके साथ ही 14 राहत शिविरों में 12,294 लोगों के रहने, खाने और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।

आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण तीव्र गति से किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में 1.29 लाख पॉलीथीन शीट और 22,900 ड्राई राशन पैकेट बांटे गए हैं। पशुओं के लिए भी 3,142 क्विंटल पशुचारा वितरित किया गया है। जलभराव वाले इलाकों में आवागमन को सुगम बनाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राज्य भर में कुल 1,832 नावों को परिचालित किया गया है। मौजूदा समय में राज्य के 13 जिलों पटना, भोजपुर, बक्सर, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार और अरवल के 79 प्रखंडों की 480 ग्राम पंचायतों की करीब 34.31 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। जहां प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति से निपटने और त्वरित राहत-बचाव कार्य के लिए राज्य में एनडीआरएफ की 10 टीमें और एसडीआरएफ की 27 टीमें विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात की गई हैं।

नदियों के जलस्तर पर भी लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। 8 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 1,04,400 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है। वहीं, वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्राव 1,69,985 क्यूसेक है। सोन नदी के इन्द्रपुरी बराज पर जलस्राव 1,04,758 क्यूसेक दर्ज हुआ है। जिसमें घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लेकिन, प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार सतर्कता बरती जा रही है।

वर्षापात के आंकड़ों के मुताबिक, 01 जून से 06 सितंबर के दौरान राज्य में औसतन 590.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बिहार मौसम सेवा केन्द्र के अनुसार, अगले तीन दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इसके मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए हैं और हर प्रभावित नागरिक तक त्वरित राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

दूसरी ओर पुनपुन नदी के जलस्तर में स्थिरता आने के बाद पटना-गया रेल खंड पर बुधवार से ट्रेनों का परिचालन सामान्य होने की उम्मीद है। पुनपुन-परसा बाजार रेल खंड के बीच पुल संख्या-21 की डाउन लाइन पर परिचालन बहाल करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, सुरक्षा के मद्देनजर फिलहाल ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 10 किलोमीटर प्रतिघंटा रहेगी। रेल प्रशासन पुल और नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रख रहा है। जलस्तर और पुल की स्थिति सामान्य रहने पर आगे गति सीमा में बदलाव किया जा सकता है। 4 सितंबर से पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन सुरक्षा की दृष्टि से रोक दिया गया था। डाउन लाइन बंद रहने के कारण पटना-गया रेल खंड की कई मेमू ट्रेनों को रद्द किया गया था। वहीं, लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों के मार्ग में भी बदलाव करना पड़ा। चार दिनों के दौरान 36 ट्रेनें रद्द रहने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे के अधिकारी और इंजीनियर पुल के आसपास जलस्तर और ट्रैक की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

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