बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार के सीमांचल में कटिहार जिले के कुरसेला थाना की पुलिस ने मद्यनिषेध पुलिस सिपाही भर्ती में सेटिंग कर नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। साथ ही, दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान पूर्णिया जिले के टिक्कापट्टी थाना क्षेत्र के सपहा निवासी सोनू कुमार तथा पुरानी नंदगोला निवासी साहिल कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने इसके कब्जे से 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों के मैट्रिक एवं इंटर के मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, भर्ती परीक्षा के एडमिट कार्ड, विभिन्न बैंकों के 18 हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, कई स्टाम पेपर, 6 कारतूस, 2 मोबाइल फोन और 1 मोटरसाइकिल बरामद की है। गिरोह के कथित मास्टरमाइंड सुजीत, संजय कुमार व मिथुन कुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापामारी कर रही है। लेकिन, तीनों मास्टरमाइंड कटिहार पुलिस के हत्थे अभीतक नहीं चढ़ सके हैं।

पुलिस अधीक्षक परिचय कुमार का कहना है कि कटिहार जिले में चलाए जा रहे विशेष समकालीन अभियान के तहत शुक्रवार यानी 17 जुलाई की देर रात कुरसेला थाना पुलिस बल्थी महेशपुर क्षेत्र में वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक ग्लैमर मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक पुलिस को देखकर भागने लगे। संदेह होने पर पुलिस ने उनका पीछा कर दोनों को पकड़ लिया। तलाशी लेने पर उनके पास से बड़ी संख्या में मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, विभिन्न बैंकों के हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, 500 रुपये मूल्य के कई स्टाम पेपर, 6 कारतूस और 2 मोबाइल फोन बरामद हुए। पूछताछ में दोनों आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे पटना निवासी सुजीत, पूर्णिया निवासी संजय कुमार और मिथुन कुमार के साथ मिलकर मद्यनिषेध पुलिस सिपाही भर्ती में नौकरी दिलाने के नाम पर सेटिंग का गिरोह चला रहे थे। गिरोह अभ्यर्थियों से अंतिम चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी 10 लाख रुपये की वसूली करता था। आरोपितों की निशानदेही पर पुलिस ने साहिल कुमार के घर छापामारी कर 2024 सिपाही भर्ती के 26 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड भी बरामद किए।
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि यह गिरोह फर्जी तरीके से किसी की बहाली करा सका इसकी सटीक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस इसे लेकर अनुसंधान कर रही है। यह गिरोह अभ्यर्थियों से 500 के स्टाम पेपर पर यह लिखवाता था कि उनकी भर्ती फर्जी तरीके से कराई जा रही है। ताकि, यदि कोई अभ्यर्थी रुपये देने से इनकार करता है तो इस दस्तावेज का इस्तेमाल कर उन्हें डराया-धमकाया जा सके। जांच के दौरान कुछ यूपीआई लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं, जिनके आधार पर आर्थिक लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में केवल 20 से 25 प्रश्नों के उत्तर देने की सलाह देता था, ताकि उन्हें यह विश्वास दिलाया जा सके कि बाकी काम उनकी कथित सेटिंग से हो जाएगा।












