अमृतसर (नितिन): 4 साल से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए क्लोफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के निश्चित खुराक संयोजन (फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन) वाली दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। स्वास्थ्य और परिवार भलाई मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि इस निश्चित खुराक संयोजन का उपयोग 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार का यह फैसला विशेषज्ञ कमेटी की जांच और दवाई तकनीकी सलाहकार बोर्ड की सिफारिशों के बाद लिया गया है। सरकार ने माना कि इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए इस संयोजन के इस्तेमाल से स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है और इसके सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं।
नोटिफिकेशन के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा इस मामले की जांच के लिए नियुक्त विशेष विशेषज्ञ कमेटी ने क्लोफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के निश्चित खुराक संयोजन से संबंधित फॉर्मूलेशन की जांच की। कमेटी ने अपनी सिफारिश में कहा कि इस संयोजन वाली दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी होनी चाहिए कि इसका उपयोग चार साल से कम उम्र के बच्चों में न किया जाए। इसके बाद दवाई तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने भी मामले की समीक्षा की और इस निश्चित खुराक संयोजन वाली दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण को नियमों के अधीन लाने की सिफारिश की। केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह फैसला लागू किया है।
अब पैकिंग पर चेतावनी लिखना अनिवार्य
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निर्माता कंपनियों को केवल दवा की बिक्री या वितरण को नियंत्रित करने तक ही सीमित नहीं रहना होगा बल्कि दवा के लेबल, पैकेज इनसर्ट (पर्चे) और प्रचार सामग्री पर भी स्पष्ट चेतावनी दर्ज करनी होगी। चेतावनी में साफ तौर पर दर्शाना होगा कि निश्चित खुराक संयोजन का उपयोग चार साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं किया जाएगा। इससे माता-पिता, डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और दवा विक्रेताओं के लिए यह बात और स्पष्ट होगी कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को इस संयोजन वाली दवा देने से परहेज किया जाना है।
माता-पिता के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के दृष्टिकोण से सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों में सर्दी, खांसी, बंद नाक या एलर्जी जैसी समस्याओं के दौरान माता-पिता कई बार बिना डॉक्टरी सलाह के दवा दे देते हैं। ऐसी स्थिति में दवा की उम्र के अनुसार योग्यता और उसके सामग्री के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। खासकर छोटे बच्चों के मामले में किसी भी दवा की खुराक और संयोजन के बारे में डॉक्टरी सलाह को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन ने अब इस खास संयोजन को लेकर उम्र की सीमा स्पष्ट कर दी है।
दवाओं की बिक्री पर निगरानी होगी अहम
केंद्र सरकार के फैसले के बाद राज्यों के दवाई नियंत्रण तंत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दवाओं की दुकानों, स्टॉकिस्टों और वितरकों तक यह निर्देश पहुंचाना जरूरी होगा ताकि चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इस निश्चित खुराक संयोजन वाली दवाओं का उपयोग न हो। इसके साथ ही निर्माता कंपनियों द्वारा पैकिंग और प्रचार सामग्री में सरकारी चेतावनी का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच भी दवाई नियंत्रण अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
नोटिफिकेशन के संबंध में कैमिस्टों को किया जागरूक
स्वास्थ्य विभाग के ड्रग विंग के जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी कुलविंदर सिंह ने बताया कि बच्चों से जुड़ी दवाओं में उम्र की पाबंदी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्लोफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के निश्चित खुराक संयोजन के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा जारी चेतावनी का पालन करवाना अनिवार्य है। दवा के लेबल और पैकेज पर दी गई चेतावनी को पढ़कर ही इसका उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि संबंधित कैमिस्ट एसोसिएशनों को सरकार की अधिसूचना के संबंध में अवगत करवा दिया गया है।
फैसला राज पत्र में प्रकाशन के साथ लागू
ड्रग कंट्रोल अधिकारी सुखदीप सिंह ने बताया कि नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह राज पत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होगी। इस तरह केंद्र सरकार ने इस मामले को सिर्फ सलाह तक सीमित न रखकर कानूनी नियमों के दायरे में ला दिया है। इस फैसले का मकसद दवाओं के इस्तेमाल को बेवजह रोकना नहीं, बल्कि एक खास उम्र वर्ग के बच्चों को संभावित खतरे से बचाना है। सरकार द्वारा नोटिफिकेशन में सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होने का भी जिक्र किया गया है।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा देने से बचना होगा
सरकार के इस फैसले के बाद माता-पिता के लिए सबसे बड़ा संदेश यह है कि छोटे बच्चों को सर्दी, खांसी या अन्य लक्षणों के लिए अपनी मर्जी से दवा न दें। दवा की बोतल या पैकिंग पर दर्ज तत्व, उम्र संबंधी निर्देश और चेतावनी ध्यान से पढ़ना जरूरी है। दूसरी ओर दवा विक्रेताओं के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे ग्राहकों को सही जानकारी दें और सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करें। खासकर चार साल से कम उम्र के बच्चों के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
सरकार का संदेश साफ: बच्चों की सुरक्षा पहले
केंद्र सरकार द्वारा विशेषज्ञ कमेटी और दवाई तकनीकी सलाहकार बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर लिया गया यह फैसला बच्चों की दवा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब इसकी असली सफलता जमीनी स्तर पर नियमों के पालन और दवाई नियंत्रण अधिकारियों की निगरानी पर निर्भर करेगी।






