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13 बार सिर पर लगी चोट, 27 की उम्र में खत्म हुआ करियर…अब इस दिग्गज क्रिकेटर ने स्कूल पर ठोका मुकदमा

On: August 25, 2026 6:09 PM
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स्पोर्ट्स नेशनल ( नॉटम ) : ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के उभरते सितारे और कभी स्टीव स्मिथ के बाद अगले बड़े सुपरस्टार के रूप में देखे जाने वाले विल पुकोवस्की ने अपने पूर्व स्कूल पर एक बड़ा मुकदमा दर्ज कराया है । पुकोवस्की का आरोप है कि उनके क्रिकेट करियर के असमय खत्म होने के पीछे उनके स्कूल की लापरवाही मुख्य कारण थी महज 27 साल की उम्र में डॉक्टरों की सलाह के बाद संन्यास लेने को मजबूर हुए इस खिलाड़ी ने अपने पूर्व स्कूल, ब्राइटन ग्रामर, के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

हेराल्ड सन की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला साल 2014 का है जब पुकोवस्की की उम्र केवल 16 साल थी। स्कूल में फुटबॉल प्रैक्टिस के दौरान उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद वे अस्वस्थ हो गए थे। पुकोवस्की के वकील के अनुसार, इस भयानक चोट के कुछ ही मिनटों बाद स्कूल ने उन्हें इलाज के लिए भेजने के बजाय दोबारा मैदान पर प्रैक्टिस के लिए भेज दिया।

अगले दिन उनकी हालत और भी खराब हो गई। स्कूल में जिम सेशन के बाद उन्हें धुंधला दिखाई देने लगा, जिसके कारण उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह उनके सिर पर लगी पहली चोट थी, जिसके बाद उन्हें अपने पूरे क्रिकेट सफर में कुल 16 बार सिर पर चोट (कनकशन) का सामना करना पड़ा।

13 बार लगी सिर पर चोट, डॉक्टरों ने दी संन्यास की सलाह

लगातार सिर पर लगती चोटों (कनकशन्स) ने पुकोवस्की के करियर को पूरी तरह तबाह कर दिया। दो साल पहले शेफील्ड शील्ड के एक मैच के दौरान तस्मानिया के तेज गेंदबाज रिले मेरेडिथ की एक तेज बाउंसर गेंद सीधे उनके सिर पर लगी थी। इस गंभीर हादसे के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सख्त सलाह दी कि वे अपने स्वास्थ्य की खातिर क्रिकेट खेलना पूरी तरह बंद कर दें, जिसके बाद महज 27 साल की उम्र में उन्हें भारी मन से संन्यास का फैसला लेना पड़ा।

बेहद प्रतिभाशाली था यह खिलाड़ी

विल पुकोवस्की ने बहुत छोटी उम्र में ही क्रिकेट की दुनिया में अपनी धाक जमा ली थी। 19 साल की उम्र में वे ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन गए थे। उन्होंने शेफील्ड शील्ड में साउथ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 255 रनों की शानदार ऐतिहासिक पारी खेली थी।

साल 2021 में लगातार दो दोहरे शतक लगाने के बाद उन्हें ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में जगह दी गई। भारत के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट मैच में उन्होंने शानदार अर्धशतक बनाया, हालांकि उसी मैच में कंधे की चोट के कारण उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा था। इस बेहद प्रतिभावान खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय करियर सिर्फ 1 टेस्ट मैच और विक्टोरिया के लिए केवल 36 प्रथम श्रेणी मैचों तक ही सीमित रह गया। अब पुकोवस्की ने अपने स्कूल की लापरवाही को अपने इस बड़े करियर के नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

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