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राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूल कैंटीन और गेट के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक

On: August 25, 2026 4:48 PM
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National (नितिन) : राजस्थान हाई कोर्ट ने बच्चों की हेल्थ, एजुकेशन और ओवरऑल डेवलपमेंट को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए, पूरे राज्य में स्कूल कैंटीन और स्कूल गेट के 50 मीटर के दायरे में जंक फ़ूड की बिक्री पर रोक लगा दी है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की अगुवाई वाली बेंच ने सोमवार को स्कूलों और उसके आसपास जंक फ़ूड की मौजूदगी और बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर चिंता जताई।

कोर्ट ने स्कूलों को ज़्यादा फैट, चीनी और नमक (HFSS) वाले खाने की चीज़ों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने का निर्देश दिया, जिसमें कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस फैट वाले बेकरी प्रोडक्ट और दूसरे जंक फ़ूड शामिल हैं। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर को पालन पक्का करने के लिए हर महीने इंस्पेक्शन करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में सुरक्षित और बैलेंस्ड खाने के लिए गाइडलाइन 2020 में बनाई गई थीं, लेकिन छह साल से ज़्यादा समय बाद भी उन्हें ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है। नियमों का पालन मज़बूत करने के लिए, हर स्कूल को चार हफ़्ते के अंदर एक स्कूल फ़ूड सेफ़्टी और न्यूट्रिशन कमेटी बनानी होगी।

स्कूलों को आठ हफ़्ते के अंदर एक मेन्यू बोर्ड लगाने का भी निर्देश दिया गया है, जिसमें कैंटीन में बिकने वाले खाने की चीज़ों की कैलोरी काउंट, सामग्री और न्यूट्रिशनल जानकारी जैसी जानकारी दी गई हो। कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि मिड-डे मील और दूसरी न्यूट्रिशनल स्कीम तय बैलेंस्ड डाइट स्टैंडर्ड को पूरा करें, ताकि बच्चों को मोटापे और लाइफ़स्टाइल से जुड़ी बीमारियों से बचाया जा सके। हाई कोर्ट ने शिक्षा में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया, साथ ही यह भी पक्का किया कि ये टूल बुनियादी सीखने के तरीकों की जगह न लें।

कोर्ट ने बच्चों की बेसिक पढ़ाई के हिस्से के तौर पर हैंडराइटिंग, किताबें पढ़ना, नोट्स बनाना और लिखित परीक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया। ग्रामीण सरकारी स्कूलों में खाली टीचिंग पोस्ट भरने और स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, हेल्थ चेक-अप, टॉयलेट, पीने का पानी और खेल की सुविधाओं जैसी ज़रूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए गए। सभी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टरों को ग्रामीण स्कूलों का सरप्राइज़ इंस्पेक्शन करने और आठ हफ़्ते के अंदर कोर्ट को कम्प्लायंस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।

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