- आप के ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के दबाव में झुकी योगी सरकार, बेसिक स्कूलों के लिए ₹604 करोड़ की घोषणा करने पर मजबूर हुई : संजय सिंह
- ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के बाद योगी सरकार जागी, अब एक महीने तक बदहाल स्कूलों की शिकायतें दर्ज कराएगी : संजय सिंह
- उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के ₹9,000 करोड़ बिना इस्तेमाल किए वापस भेजे : संजय सिंह
- आप सांसद संजय सिंह ने स्कूलों की बदहाली के खिलाफ संसद की याचिका समिति में की शिकायत
- स्कूलों को बदहाल करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे सांसद संजय सिंह
- आप नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रही एफआईआर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे : संजय सिंह
- अब 1 महीने तक हर जिले के जर्जर स्कूलों की सूची सीधे शासन-प्रशासन को सौंपेंगे : संजय सिंह
- योगी सरकार के ‘स्कूल मर्जर’ का सच बेनकाब, बदहाली छुपाने के लिए सच दिखाने वालों पर दर्ज हो रहे झूठे मुकदमे : संजय सिंह
लखनऊ : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने आज लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों के अवैध मर्जर और बदहाली को लेकर योगी सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ‘जबरा मारे, रोवे न दे’ की नीति पर चल रही है—यानी जनता को कष्ट भी देंगे और सवाल पूछने पर मुकदमा दर्ज करेंगे।
विधानसभा में झूठ और यू-डायस (U-DISE) का फर्जीवाड़ा
संजय सिंह ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने स्कूलों के मर्जर का विरोध किया था, तब सरकार ने विधानसभा में दावा किया था कि कोई स्कूल बंद या मर्ज नहीं होगा। लेकिन 15 अगस्त से शुरू हुए ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ में जब जर्जर स्कूलों की असलियत सामने आई, तो प्रशासन कहने लगा कि ये स्कूल मर्ज हो चुके हैं। हकीकत यह है कि यू-डायस पोर्टल पर इन स्कूलों को अब भी उसी पते पर संचालित दिखाया जा रहा है। सरकार केवल कागजों में स्कूल चला रही है और अपनी बदहाली को छुपाने के लिए झूठ का सहारा ले रही है।

सांसद संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी के अभियान के दबाव में आकर आखिरकार सरकार जागी और बेसिक स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹604 करोड़ खर्च करने की घोषणा की। हालांकि, केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार के ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत मिले ₹9,000 करोड़ उत्तर प्रदेश सरकार ने बिना खर्च किए वापस भेज दिए, तो प्रदेश के बच्चे टूटे क्लासरूम, बिना बिजली-पंखे, बिना बाउंड्री और खराब मिड-डे मील जैसी बदहाली झेलने को क्यों मजबूर हैं? ₹62,000 करोड़ के बजट में से ₹30,000 करोड़ का बजट वापस भेजा गया, ताकि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया जा सके।
संसदीय समिति से जांच की मांग: उत्तर प्रदेश में स्कूलों की बदहाली, मिड-डे मील में भ्रष्टाचार और केंद्र से मिले शिक्षा फंड को खर्च न करने के मामले की संसद की याचिका समिति (Committee on Petitions) से जांच कराने की मांग की गई है। याचिका समिति को पूरे उत्तर प्रदेश में स्कूलों की बदहाली के संबंध में, बच्चों को जो खाना, सड़ा हुआ दिया जाता है उसके संबंध में, हरदोई के डीएम और कई जिलों के बीएसए और डीएम जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सच्चाई दिखाने वालों पर एफआईआर दर्ज की, उनके संबंध में एक विस्तृत शिकायत की है।

बौद्ध प्रान्त अध्यक्ष इमरान लतीफ और पार्टी प्रवक्ता मुकेश सिंह (वाराणसी) सहित सभी कार्यकर्ताओं पर सच्चाई उजागर करने के लिए दर्ज की गई एफआईआर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों को बदहाल करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिए जाएंगे।
अगले एक महीने तक ‘आप’ कार्यकर्ता सभी जिलों के जर्जर स्कूलों, टॉयलेट, बाउंड्री और मिड-डे मील की समस्याओं की लिखित शिकायत सीधे बीएसए, शिक्षा निदेशक और मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपेंगे। यदि एक महीने में निर्माण और सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ, तो दोबारा जमीनी स्तर पर जाकर सरकार की पोल खोली जाएगी।
महंगाई, रोजगार और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरा
प्रेस वार्ता में अन्य समसामयिक मुद्दों पर बोलते हुए संजय सिंह ने कहा:
महंगाई का सच बोलने पर निलंबन निंदनीय: जौनपुर में चीनी की महंगाई पर अपनी बात रखने वाले लेखपाल अशोक यादव का निलंबन प्रशासनिक चाटुकारिता का प्रमाण है; आम आदमी पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
शिक्षकों के 2 लाख पद खाली: सरकार चुनाव नजदीक आते ही 1 लाख नौकरियों का दावा कर रही है, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग में ही 2 लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
भाजपा संविधान और आरक्षण के लिए सबसे बड़ा खतरा है ।
आरक्षण के खिलाफ आंदोलन के पीछे भारतीय जनता पार्टी के लोगों की साजिश है। वो चाहते हैं पिछड़े, दलित और सवर्ण आपस में लड़ते रहें और वो वोट का उल्लू सीधा करते रहें।
आम आदमी पार्टी का मानना है आरक्षण संविधान के द्वारा दिया गया अधिकार है, और इसको छीनने का हक किसी को नहीं है।
उन्होंने कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती में पिछड़े-दलित वर्ग के आरक्षण के साथ किए गए खिलवाड़ और आरक्षण विरोधी साजिशों के खिलाफ सामाजिक न्याय की लड़ाई सड़क से संसद तक जारी रहेगी।











