National (नितिन): उपमुख्य सचेतक एवं विधायक केवल सिंह पठानिया ने शिमला स्तिथ गग्गल एयरपोर्ट के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि प्रभावितों को मुआवजा देने के लिए लगभग 4000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह देश की पहली सरकार है जिसने विस्थापित होने वाले परिवारों को पुनर्वास और पुनर्स्थापन के तहत 9.5 लाख रुपए प्रति परिवार उजाड़ू भत्ता दिया है। पठानिया ने शिमला में प्रैसवार्ता में बताया कि गग्गल एयरपोर्ट के आसपास काम करने वाले छोटे कामगारों, रेहड़ी-फड़ी वालों, सब्जी बेचने वालों, नाई और धोबी आदि जिनकी वहां अपनी जमीन नहीं थी, उनके पुनर्वास के लिए भी कैबिनेट ने 18.5 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।
उन्होंने सदन में उन परिवारों का मुद्दा भी उठाया जो 1950 या 1970 के दशक से वहां रह रहे हैं, लेकिन जमीन उनके नाम पर नहीं है। ऐसे करीब 60-70 परिवारों की सूची सरकार को सौंपी गई है। पठानिया ने मांग की है कि जब सरकार 4000 करोड़ रुपए का मुआवजा दे रही है, तो इन बचे हुए परिवारों को भी पुनर्वास और पुनर्स्थापन के तहत मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान राहत शिविरों में प्रशासन ने बेहतरीन काम किया। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि प्रभावित लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़े, बल्कि प्रशासन ने खुद कैंप में जाकर एस.डी.एम. की मौजूदगी में मात्र दो दिन के भीतर बच्चों के जरूरी सर्टीफिकेट और आधार कार्ड बनाकर दिए।
शिमला में प्रैसवार्ता के दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का आपदा प्रबंधन और गग्गल एयरपोर्ट के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर किए गए कार्यों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए ऐतिहासिक कदमों की जानकारी देते हुए कुछ छूटे हुए परिवारों के लिए भी मुआवजे की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मात्र 4 घंटे के भीतर बिजली, पानी और सड़कें बहाल कर दीं। इसके अलावा, एक उच्च शिक्षित प्रभावित लड़की को आऊटसोर्स के आधार पर नौकरी भी प्रदान की गई। इसके लिए उन्होंने राजस्व मंत्री और मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।







