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Shimla: सदन में गूंजा टांडा मैडीकल कॉलेज का मुद्दा, MRI के लिए तीन महीने की तारीख, दवाइयां भी नहीं मिल रहीं

On: August 25, 2026 9:30 PM
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राष्ट्रीय (नितिन): विधानसभा में नियम 130 के तहत स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति पर चर्चा के दौरान कांगड़ा से विधायक पवन कुमार काजल ने टांडा मैडीकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि टांडा मैडीकल कॉलेज में रोजाना 2000 से 2500 के करीब ओपीडी रहती है। 6 जिलों से मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं, लेकिन कई जांच सुविधाओं के लिए लंबी वेटिंग मिल रही है। काजल ने कहा कि टांडा मैडीकल कॉलेज में एमआरआई की एक मशीन है और मरीजों को इसकी जांच के लिए करीब 3 महीने बाद की तारीख दी जा रही है।

अल्ट्रासाऊंड की 2 मशीनें हैं, लेकिन इसकी भी करीब एक महीने की वेटिंग है। सीटी स्कैन और एक्स-रे के लिए भी मरीजों को डेट पर डेट मिल रही है। उन्होंने कहा कि कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के मरीज सुबह 6-7 बजे तक पहुंच जाते हैं, लेकिन पर्ची बनवाने और डॉक्टर को दिखाने में दोपहर हो जाती है। उन्होंने पर्ची बनाने के लिए 3-4 काऊंटर करने की मांग रखी।

इस दौरान काजल ने चम्बा जिले के मरीज से संबंधित ईएनटी विभाग का मामला उठाते हुए 4 अगस्त, 2026 को पंजाब केसरी में प्रकाशित खबर का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि खबर के अनुसार दो छोटे बच्चों को ऑप्रेशन की तारीख 6 महीने बाद की दी गई। काजल ने ईएनटी विभाग के एचओडी मुनीष सरोच के हवाले से कहा कि वहां की मशीनरी काफी पुरानी हो चुकी है। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य मंत्री से इसका संज्ञान लेने की मांग की।

काजल ने कहा कि आज टांडा मैडीकल कॉलेज में एजीथ्रोमाइसिन, अमोक्सिसिलिन और पैंटाप्राजोल जैसी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले हार्ट के मरीजों को पूरे महीने की दवाई मिलती थी, लेकिन अब उन्हें चार-पांच हजार रुपए तक की दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की बात हो रही है, लेकिन छोटी-छोटी सुविधाओं की तरफ भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने टांडा मैडीकल कॉलेज में बहुमंजिला पार्किंग बनाने और अस्पताल में आने वाले 400-500 तीमारदारों के रहने की सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई। काजल ने टांडा मैडीकल कॉलेज में स्टंट की खरीद को लेकर सामने आई खबरों का भी सदन में उल्लेख किया।

काजल ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने टांडा मैडीकल कॉलेज के प्रशिक्षु डॉक्टरों और नर्सों की ओर से पीने का पानी दूषित होने की बात, 6 महीने बाद सर्जरी के लिए बुलाए जाने और कांगड़ा सिविल अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद ऑप्रेशन नहीं होने संबंधी खबरों का भी उल्लेख किया।

काजल ने चर्चा के दौरान हिमकेयर और आयुष्मान योजना का भी उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने पूर्व सरकार के समय खोले गए कुछ स्वास्थ्य संस्थानों को बंद किए जाने का भी मुद्दा सदन में उठाया। काजल ने कहा कि सीएचसी कांगड़ा में अल्ट्रासाऊंड मशीन कई वर्षों से जंग खा रही है और वहां आईसीयू नहीं है। त्यारा के आदर्श स्वास्थ्य संस्थान में 10 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 8 भरे हुए हैं, लेकिन वहां कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध करवाने की मांग की।

कांगड़ा में नहीं लगी एक भी ईंट

काजल ने कहा कि कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र में कहीं भी कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि विधानसभा क्षेत्र में एक भी ईंट लगी हो तो उन्हें बताया जाए। उन्होंने कहा कि देहरा व नादौन में काम चले हैं। इस दौरान सदन में शोर शराबा भी हुआ।

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