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मुखिया दीदी के नाम से चर्चित रितु जायसवाल ने थामा भाजपा का दामन, राजद को बड़ा झटका.

On: May 29, 2026 3:12 AM
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बिहार में राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और ’मुखिया दीदी’ के नाम से चर्चित रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा का दामन थाम चुकी हैं। राजधानी पटना में वीरचंद पटेल पथ स्थित बिहार भाजपा के प्रदेश दफ्तर में हाल ही में आयोजित एक समारोह में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व दरभंगा शहर के विधायक संजय सरावगी ने उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई है। उनके इस कदम को बिहार की राजनीति में राजद के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद रितु जायसवाल ने साफ कहा कि उनके पुराने वीडियो और बयानों को लेकर उन्हें ट्रोल किया जा सकता है। लेकिन, वह इससे डरने वाली नहीं हैं।

बिहार की चर्चित महिला नेता रितु जायसवाल ने कहा कि जब उन्होंने परिहार विधानसभा क्षेत्र से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया था, तब लोगों ने उन्हें ‘बागी’ कहा। लेकिन, असल में परिहार की जनता बदलाव चाहती थी। उन्होंने कहा कि लोगों ने मुझे भरपूर समर्थन दिया और करीब 60 हजार वोट मिले। इससे साफ था कि जनता मेरे साथ थी। भाजपा में शामिल होने के फैसले पर उन्होंने कहा कि यह पार्टी राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखती है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। वहीं, बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने रितु जायसवाल का स्वागत करते हुए राजद पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर हमने अपने दरवाजे पूरी तरह खोल दिए, तो राजद की चौखट पर नेता दिखाई नहीं देंगे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा लगातार मजबूत हो रही है और दूसरे दलों के नेता भी भाजपा की विचारधारा से प्रभावित हो रहे हैं।

वर्ष 2025 के अक्टूबर-नवंबर महीने में संपन्न हुए 18वीं बिहार विधानसभा आम चुनाव में राजद ने परिहार विधानसभा क्षेत्र से रितु जायसवाल का टिकट काट दिया था। राजद ने वहां से राजद के प्रदेश अध्यक्ष रहे कद्दावर नेता व एमएलसी डॉ.रामचंद्र पूर्वे की पुत्रवधू डॉ.स्मिता पूर्वे को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद नाराज रितु जायसवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने करीब 60 हजार वोट हासिल किए। माना गया कि उनके चुनाव लड़ने से राजद प्रत्याशी डॉ.स्मिता पूर्वे को बड़ा नुकसान हुआ। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उन्होंने 60 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए और राजद प्रत्याशी डॉ.स्मिता पूर्वे को तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया। जबकि, भाजपा प्रत्याशी गायत्री देवी ने जीत दर्ज की। निर्दलीय चुनाव लड़ने को दलीय अनुशासन के खिलाफ मानते हुए राजद ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

वैसे, रितु जायसवाल बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रही। वह राजद महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं। इसके अलावा 2021 से 2023 तक राजद की राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुकीं हैं। दिलचस्प बात यह है कि रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर जद(यू.) से शुरू हुआ था। बाद में उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की दल राजद का दामन थामा और तेजी से राजद में अपनी जगह बनाई। अब वह तीसरी बार राजनीतिक पाला बदलकर भाजपा में शामिल हुई हैं।

2020 के 17वीं बिहार विधानसभा आम चुनाव में राजद ने उन्हें परिहार विधानसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाया था। वहीं, 2024 के जून महीने में संपन्न हुए 18वीं लोकसभा आम चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर लोकसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा था। लोकसभा चुनाव में उन्हें करीब 4.47 लाख वोट मिले थे, लेकिन वह जद(यू.) की लवली आनंद से करीब 29 हजार वोटों से हार गई थीं।

मुंबई की कॉरपोरेट जिंदगी छोड़कर 2016 में रितु जायसवाल सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड स्थित सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया चुनी गईं और पंचायत स्तर पर किए गए कार्यों की वजह से तेजी से चर्चाओं में आईं। उन्हें 2017 में एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट द्वारा ‘आदर्श युवा सरपंच सम्मान’ दिया गया। इसके बाद 2018 में उपराष्ट्रपति के हाथों ‘चौंपियंस ऑफ चेंज’ पुरस्कार भी मिल चुका है। वर्ष 2019 में उनकी पंचायत को दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से नवाजा गया था। सिंहवाहिनी पंचायत की पहली बार मुखिया बनीं रितु जायसवाल ने ग्रामीण विकास और महिला नेतृत्व की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। पढ़ी-लिखी और सक्रिय महिला नेता के रूप में उन्होंने अपनी अलग छवि बनाई। वह वैश्य समाज से आती हैं और उत्तर बिहार के कई जिलों में महिलाओं, युवाओं और वैश्य समुदाय के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनके पति अरूण कुमार चौधरी आईएएस अधिकारी रह चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रितु जायसवाल वैश्य समाज से आती हैं, जो ओबीसी वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। भाजपा पिछले कुछ वर्षों से इस वर्ग के नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रही है। ऐसे में रितु जायसवाल की एंट्री भाजपा के सामाजिक समीकरण को और मजबूत कर सकती है। खासकर मिथिलांचल व उत्तर बिहार की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है।

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