योगी सरकार प्रदेश में बुनियादी शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में सरकार ने मथुरा, प्रतापगढ़ और बलरामपुर में ‘मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ के निर्माण के लिए कुल 74.26 करोड़ रुपये से अधिक (7426.01 लाख रुपये) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक की शिक्षा एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएगी।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ योजना के तहत प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएगी।
अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि मथुरा, प्रतापगढ़ और बलरामपुर में स्वीकृत इन विद्यालयों से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
तीनों परियोजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि की 50 प्रतिशत प्रथम किस्त, करीब 37.13 करोड़ रुपये, भी तत्काल प्रभाव से अवमुक्त कर दी गई है। इन विद्यालयों का निर्माण नामित कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा कराया जाएगा।
जनपद मथुरा के विकासखंड बलदेव के ग्राम नेरा बांगर, तहसील महावन में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय का निर्माण कराया जाएगा। परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 2478.93 लाख रुपये है, जबकि प्रथम किस्त के रूप में 1239.465 लाख रुपये अवमुक्त किए गए हैं।
प्रतापगढ़ के विकासखंड रामपुर संग्रामगढ़ की ग्राम पंचायत रामपुर बावली, तहसील लालगंज में विद्यालय का निर्माण होगा। इसके लिए 2467.08 लाख रुपये की कुल प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है। परियोजना की प्रथम किस्त के रूप में 1233.54 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
बलरामपुर में ग्राम महादेव मिश्र, तहसील बलरामपुर में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए 2480 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रथम किस्त के तौर पर 1240 लाख रुपये अवमुक्त किए गए हैं।
विशेष सचिव बेसिक शिक्षा अवधेश कुमार तिवारी की ओर से जारी आदेश में निर्माण कार्यों के दौरान निर्धारित वित्तीय मानकों और गुणवत्ता का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि परियोजनाओं में किसी भी प्रकार का पुनरीक्षण अथवा लागत वृद्धि स्वीकार नहीं की जाएगी।












