बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। नीट-यूजी पुनर्परीक्षा-2026 फर्जीवाड़े की जांच में आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू के हाथ ऐसे तकनीकी सुराग लगे हैं, जिनसे पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली धीरे-धीरे सामने आने लगी है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, गिरोह ने प्रत्येक फर्जी परीक्षार्थी के लिए ’220’ को विशेष पहचान (सीक्रेट कोड) के रूप में तय किया था। परीक्षा केंद्र पर पहुंचते ही साल्वर ने बायोमीट्रिक डेस्क पर यही कोड बताया था, जिसके बाद उसे पूर्व नियोजित तरीके से आगे की प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा केंद्र पर उपलब्ध 6 बायोमीट्रिक टैब और पंच मशीनों में केवल 4 मशीनों का नियमित उपयोग किया जा रहा था। जबकि, 2 मशीनों को निष्क्रिय रखा गया था। पूछताछ में यह सामने आया है कि इन्हीं निष्क्रिय मशीनों का उपयोग फर्जी बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए किया गया। पहले वास्तविक अभ्यर्थी की उपस्थिति दर्ज कर उसे परीक्षा केंद्र से वापस भेज दिया गया था। इसके बाद साल्वर की औपचारिक बायोमीट्रिक प्रक्रिया कर उसके प्रवेश पत्र पर एनटीए का होलोग्राम चिपकाया गया और उसे परीक्षा कक्ष में भेज दिया गया। जांच एजेंसी के सामने एक और महत्वपूर्ण तथ्य आया है कि गिरफ्तार साल्वरों के पास जो आधार कार्ड मिले, वह हाल के दिनों में अपडेट कराए गए थे। आधार में लगी तस्वीरें मूल साल्वर से काफी मिलती-जुलती थीं, जिससे सामान्य सत्यापन के दौरान पहचान करना मुश्किल हो गया था। यही तस्वीरें प्रवेश पत्र पर भी प्रयुक्त होने की बात सामने आई है। इससे प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।

सूत्र बताते हैं कि ईओयू अब आधार अपडेट की समयावधि, फोटो संशोधन, बायोमीट्रिक लाग, टैब के तकनीकी रिकार्ड, प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा केंद्र पर तैनात कर्मियों की भूमिका का डिजिटल विश्लेषण कर रही है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि निष्क्रिय बताई गई मशीनें किसके नियंत्रण में थीं। किसके आदेश पर जानबूझकर फर्जी प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया गया था। सूत्र बताते हैं कि ईओयू फरार मास्टरमाइंड रविशंकर उर्फ सम्राट सिंह की गिरफ्तारी के लिए सक्रिय हो गई है। साथ ही, गिरफ्तार साल्वर को रिमांड पर लेने की तैयारी पूरी कर ली है। एक दो रोज में नए राज का पर्दाफाश संभव है।

वैसे, नीट-यूजी पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़े में लखीसराय से शुरू हुई जांच अब पूरे बिहार में सक्रिय सॉल्वर नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में बढ़ चुकी है। ईओयू अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस वर्ष 21 जून को आयोजित पुनर्परीक्षा के दौरान सॉल्वर गिरोह का नेटवर्क राज्य के किन-किन जिलों तक फैला था। जांच एजेंसी का मानना है कि लखीसराय का यह मामला किसी एक परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं है। बल्कि, यह एक बड़े और संगठित अंतर-जिला व राज्य नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसे देखते हुए ईओयू ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, ईओयू ने लखीसराय में गिरफ्तार 30 आरोपितों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), डिजिटल चैट, यात्रा विवरण और संपर्कों की गहन जांच शुरू कर दी है। जिन जिलों अथवा व्यक्तियों से संदिग्ध कड़ियां सामने आ रही हैं, वहां जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

इधर, गिरफ्तार गिरोह सरगना अर्पित सिंह के मोबाइल चैट से चौंकाने वाली जानकारी मिली है। उसने राज्य के विभिन्न जिलों के दर्जन भर मेडिकल छात्रों से सॉल्वर के रूप में काम करने की डील की थी। इस आधार पर एजेंसी अब अन्य जिलों के अभ्यर्थियों, बिचौलियों और मेडिकल कॉलेजों से इस गिरोह के संबंधों की कड़ियां जोड़ रही है। जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पूरे नेटवर्क की कमान संभालने वाले मास्टरमाइंड तक पहुंचना है। सूत्र बताते हैं कि ईओयू जल्द ही कोर्ट में आवेदन देकर जेल में बंद 12 मेडिकल छात्रों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। रिमांड पर लेकर पूछताछ के दौरान यह जानने का प्रयास होगा कि इस गिरोह का संचालन कैसे होता था, अभ्यर्थियों का चयन किस आधार पर किया जाता था और इसकी अन्य शाखाएं कैसे काम कर रही थीं। इसके साथ ही इनके आर्थिक लेन-देन का भी पता लगाया जाएगा। जांच में अब तक मिले इनपुट के मुताबिक, लखीसराय के परीक्षा केंद्रों पर बायोमीट्रिक सेटिंग की जिम्मेदारी प्रमोद कुमार यादव के पास थी। वहीं, दूसरी ओर, परीक्षा के लिए सॉल्वर उपलब्ध कराने का जिम्मा अर्पित सिंह तथा फरार आरोपित रविशंकर उर्फ सम्राट सिंह संभाल रहे थे। इस फर्जीवाड़े के तार पावापुरी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी पीएमसीएच और कोटा से भी जुड़े मिले हैं। इसके बाद जांच एजेंसी को आशंका है कि अलग-अलग गिरोह राज्य के अलग-अलग जिलों के लिए समानांतर रूप से काम कर रहे थे। ईओयू अब बायोमीट्रिक कर्मियों, सॉल्वरों और गिरफ्तार मेडिकल छात्रों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है। साथ ही, संबंधित मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों से प्राप्त सूचनाओं का मिलान भी किया जाएगा, ताकि पूरे सॉल्वर नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

दर्ज 3 मामलों की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू ने विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) का गठन किया है। 12 सदस्यीय इस एसआईटी का नेतृत्व डीआईजी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी में 1 एसपी, 5 डीएसपी और 5 इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह एसआईटी लखीसराय के किऊल व कवैया थाना में दर्ज नीट-यूजी पुनर्परीक्षा से संबंधित तीनों मामलों को टेकओवर कर उनकी विस्तृत जांच में जुटी है। नीट-यूजी पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार सभी 30 आरोपितों को 22 जून की देर शाम को ही मेडिकल जांच के बाद न्यायिक हिरासत में लखीसराय मंडल कारा भेज दिया गया है। जेल भेजे गए आरोपितों में 12 मेडिकल छात्र, 1 मूल परीक्षार्थी और 17 बायोमेट्रिक कर्मी शामिल हैं।











