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डॉ.सुनील सिंह को एमएलसी की निर्विरोध मिली कुर्सी, पटना में लग गए ’नटवरलाल’ के पोस्टर!  

On: June 13, 2026 5:23 PM
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बिहार विधान परिषद में पहुंचने के बाद राजद नेता डॉ.सुनील कुमार सिंह एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। राजधानी पटना के कई इलाकों में उनके खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों में उन्हें ‘बिहार का नटवरलाल’ बताते हुए एमएलसी बनने पर तंज कसा गया है। पोस्टर में केवल डॉ.सुनील सिंह ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों का भी जिक्र किया गया है। विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए कथित तौर पर धोखाधड़ी और गबन के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पोस्टर लगाने वालों की पहचान भी सामने नहीं आई है। बिहार की राजनीति में पोस्टर वार कोई नई बात नहीं है। लेकिन, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंह बोले भाई डॉ.सुनील सिंह के एमएलसी बनने के तुरंत बाद ऐसे पोस्टरों का सामने आना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। इसे बिहार विधान परिषद चुनाव के बाद शुरू हुई नई सियासी लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। नवनिर्वाचित एमएलसी डॉ.सुनील सिंह को राजद द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने के फैसले पर पहले भी पार्टी के भीतर असहजता दिखाई दी थी। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की सिंगापुर वाली पुत्री रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ’एक्स’ पर अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जाहिर की थी। हालांकि, राजद नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा और वे तीसरी बार विधान परिषद पहुंचे हैं। बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर हुए चुनाव में मतदान की नौबत नहीं आई और सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इनमें राजद के खाते में र्सिफ एक सीट आई, जिस पर डॉ.सुनील सिंह निर्वाचित हुए हैं। लेकिन, जीत के कुछ ही दिनों बाद उनके खिलाफ लगे पोस्टरों ने नई बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये पोस्टर किसने लगाए। पोस्टर पर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चायें हो रही हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बनता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में चुनावी माहौल बनने से पूर्व पोस्टर वार की राजनीति तेज हो सकती है। डॉ.सुनील सिंह को लेकर लगे इन पोस्टरों को कुछ लोग राजनीतिक विरोध का हिस्सा मान रहे हैं, तो कुछ इसे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और गरमाने के संकेत हैं।

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