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NSA अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार, गृहमंत्री अमित शाह ने किया सम्मानित

On: August 1, 2026 9:14 AM
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राष्ट्रीय : भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। यह आयोजन स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि के अवसर पर लोकमान्य तिलक मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया। अमित शाह ने अजीत डोभाल को पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, स्मृति चिन्ह, एक चेक और ‘गीता रहस्य’ पुस्तक की प्रति भेंट की। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार भी मौजूद रहे।

देश की महान हस्तियों की सूची में शामिल

इस पुरस्कार के साथ अजीत डोभाल का नाम उन महानतम व्यक्तित्वों की सूची में जुड़ गया है, जिन्हें पहले यह सम्मान मिल चुका है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी शामिल हैं। तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दीपक तिलक ने बताया कि डोभाल को राष्ट्र की सुरक्षा में उनके अद्वितीय और साहसिक आजीवन योगदान के लिए सर्वसम्मति से चुना गया।

गृह मंत्री का भावुक बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “जब मैं गुजरात का गृह मंत्री था, तब अजीत डोभाल से मिला था। देश में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की जांच और उनका खुलासा गुजरात पुलिस ने किया था। जब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का इतिहास लिखा जाएगा, तो उसमें अजीत डोभाल का योगदान एक स्वर्णिम अध्याय होगा। उनके योगदान से भारत की मजबूत विदेश नीति को और मजबूती मिली है। 1972 से लेकर आज तक उन्होंने कई मोर्चों पर काम किया। वे कई सालों तक पाकिस्तान में रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज वे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उन्होंने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और सशस्त्र बलों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।”

आज का दिन विशेष है’

पुरस्कार स्वीकार करते हुए अजीत डोभाल ने कहा, “आज का दिन विशेष है क्योंकि यह लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि है, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाई। मैं विनम्रतापूर्वक यह पुरस्कार स्वीकार करता हूं। लोकमान्य तिलक स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रदूत थे। उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और ऐसी चेतना जगाई जिसने स्वतंत्रता संग्राम का मार्गदर्शन किया। अपने बेटे की मृत्यु के बाद भी उन्होंने पुणे नहीं छोड़ा। पुणे की धरती समाज सुधारकों और क्रांतिकारियों की धरती है।”

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