Why is Sawan Lord Shiva Favorite Month : सनातन धर्म में सावन माह का बहुत खास महत्व है। 30 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है। सावन माह भगवान शिव को समर्पित है। सावन का महीना आते ही हर तरफ भगवान शिव की भक्ति, हर-हर महादेव के जयकारे और शिवलायों में गूंजते मंत्र सुनाई देते हैं। माना जाता है कि इस माह में सच्चे मन से शिव जी की पजा करने और व्रत रखने से मन की हर मुराद पूरी होती है और जीवन की हर समस्या दूर होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर भोलेनाथ को सावन का महीना ही इतना प्रिय क्यों है। जबकि हिंदू पंचांग में चैत्र, वैशाख, आषाढ़ जैसे कई पवित्र महीने आते हैं, तो फिर भगवान शिव ने सावन को ही अपनी भक्ति के लिए विशेष स्थान क्यों दिया। तो आइए जानते हैं इसके पीछे छुपे रहस्य के बारे में-
कथा के अनुसार, जब संत कुमारों द्वारा भगवान शिव से सावन मास के इतना प्रिय होने की वजह पुछी गई तो कहते हैं कि भगवना शिव ने उत्तर देते हुए कहा कि, जब देवी सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंची तो राजा दक्ष ने उनके और उनके पति का अपमान किया, जिसके बाद देवी सती ने उसी अग्नि कुंड में अपना देह त्याग कर दिया। लेकिन उससे पहले उन्होंने महादेव को हर जीवनकाल में अपने पति के रूप में पाने का प्रण लिया था। जिसके बाद देवी सती ने अपने दूसरे जन्म में देवी पार्वती के रूप में राजा हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री रूप में जन्म लिया।
कहते हैं कि देवी पार्वती नें अपनी युवावस्था में सावन के महीने में सब त्याग कर निराहार रहते हुए कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूपर में स्वीकार कर लिया। मान्यता है कि तभी से भगवान शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा एक अन्य कथा के अनुसार कहा जाता है कि सावन के महीने में भी भगवानम शिव धरती पर अवतरित हुए थे और अपने ससुराल गए थे। जहां उनका स्वागत जलाभिषेक और अर्घ्य देकर किया जाता है। मान्यता है हर सावन भगवान शिव अपने ससुराल आते हैं और वहीं रहते हैं।
इसके अतिरिक्त सावन मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माने जाने के पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक प्रसंग भी बताया जाता है। मान्यता है कि महर्षि मृकंडु के पुत्र ऋषि मार्कंडेय ने अल्पायु के योग को बदलने के लिए सावन के पावन महीने में भगवान शिव की कठोर आराधना और निरंतर तप किया। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दीर्घायु का वरदान प्रदान किया और अपनी विशेष कृपा से अभय का आशीर्वाद दिया। कहा जाता है कि शिव कृपा के प्रभाव से मृत्यु के देवता यमराज भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सके। इसी कारण सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।








