Colorectal Cancer: कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) दुनिया भर में तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में शामिल है। अच्छी बात यह है कि अगर इस बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो इसका इलाज आसान हो सकता है और कई मामलों में इसे गंभीर होने से पहले रोका भी जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को नियमित रूप से कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग करानी चाहिए। वहीं जिन लोगों के परिवार में इस कैंसर का इतिहास रहा है या जिन्हें पहले से आंतों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर कम उम्र में ही जांच शुरू कर देनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कैंसर की शुरुआत अक्सर बिना किसी बड़े लक्षण के होती है। कई बार शुरुआती संकेत इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें गैस, कब्ज या पाचन संबंधी साधारण समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बाद में बीमारी को गंभीर बना सकती है।
1. मल में खून आना
अगर मल त्याग के दौरान या बाद में खून दिखाई देता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार यह बवासीर जैसी सामान्य समस्या की वजह से हो सकता है, लेकिन लगातार खून आना बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। खून का रंग चमकीला लाल या गहरा काला भी हो सकता है। यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से तुरंत जांच करानी चाहिए।
2. शरीर में आयरन की कमी
अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के शरीर में आयरन की कमी या आयरन-डिफिशिएंसी एनीमिया हो जाए, तो यह आंतों के अंदर धीरे-धीरे हो रही ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है।
इसके सामान्य लक्षण हैं-
-हमेशा थकान महसूस होना
-कमजोरी आना
-थोड़ी मेहनत में सांस फूलना
-बार-बार चक्कर आना
यदि आयरन की दवा लेने के बाद भी समस्या ठीक नहीं होती, तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
3. मल त्याग की आदतों में बदलाव
अगर कई हफ्तों तक मल त्याग का पैटर्न बदला हुआ रहे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।
ध्यान देने योग्य बदलावों में शामिल हैं….
-बार-बार शौच जाना
-कई दिनों तक कब्ज रहना
-लगातार दस्त होना
-मल का बहुत पतला या पेंसिल जैसा दिखना
हालांकि खान-पान, तनाव या दवाओं से भी ऐसा हो सकता है, लेकिन यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो मेडिकल जांच जरूरी है।
4. पेट में लगातार दर्द या ऐंठन
अगर पेट में दर्द, ऐंठन, गैस या पेट फूलने की समस्या लगातार बनी रहती है और सामान्य दवाओं से आराम नहीं मिलता, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दर्द समय के साथ बढ़ता जाए या इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
5. बिना कारण तेजी से वजन कम होना
अगर बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज किए अचानक वजन कम होने लगे, तो यह शरीर में किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। जब यह समस्या पेट या आंतों से जुड़े लक्षणों के साथ दिखाई दे, तो तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए।
क्या हर लक्षण का मतलब कैंसर है?
डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कोलोरेक्टल कैंसर नहीं होता। कई बार इनके पीछे दूसरी सामान्य बीमारियां भी हो सकती हैं। लेकिन यदि शुरुआती इलाज के बाद भी समस्या बनी रहती है और कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता, तो डॉक्टर कोलोनोस्कोपी जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
समय पर स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर स्क्रीनिंग है। स्क्रीनिंग के दौरान आंतों में बनने वाले प्री-कैंसरस पॉलीप्स की पहचान कर उन्हें शुरुआती चरण में ही हटाया जा सकता है, जिससे कैंसर बनने का खतरा काफी कम हो जाता है। सामान्य जोखिम वाले लोगों के लिए 45 से 75 वर्ष की उम्र के बीच नियमित स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है। वहीं जिन लोगों के परिवार में इस बीमारी का इतिहास है, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) जैसी समस्या है या कोई आनुवंशिक जोखिम मौजूद है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार पहले और अधिक बार जांच करानी चाहिए।








