बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को राजधानी पटना में ऐतिहासिक गांधी मैदान स्थित आईएमए हॉल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में शिक्षा के सवाल पर आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर बिहार तक छात्रों की सक्रिय भागीदारी इस आंदोलन में संघर्ष की व्यापकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को दबाने की मोदी सरकार की कोशिश नाकाम साबित हुई है। क्योंकि, इस आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि मजदूर और मेहनतकश तबके भी उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों वीडियो जारी कर के कहा कि छात्रों को हम माफ कर रहे हैं। लेकिन, वीडियो से ऐसा लग रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी माफ करने के बहाने रूढ़िवादी एवं पितृसत्तात्मक ताकतों को उकसा रहे हैं। एक 15 वर्षीय छात्रा तक को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। नई पीढ़ी के साथ खड़ा होना लोकतंत्र की रक्षा का प्रश्न है और शिक्षा व्यवस्था में कारगर सुधार के लिए भाकपा-माले छात्र आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है। दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब जवाबदेही गृह मंत्री अमित शाह की भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को वापस नहीं लिया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को भाकपा-माले विधायक संदीप सौरभ, आईसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय, उपाध्यक्ष सबा आफरीन, सचिव दीपांकर मिश्रा, आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा व राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन ने भी संबोधित किया।
छात्र नेता से भाकपा-माले विधायक बने संदीप सौरभ ने कहा कि देशभर के छात्र-युवाओं में मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है और छात्र-नौजवान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन, विशेषकर छात्राओं को निशाना बनाकर उसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर बिहार के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त की जा रही है और लगातार फीस वृद्धि के माध्यम से गरीब एवं वंचित तबकों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर धकेला जा रहा है। वहीं, आईसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय एवं सचिव दीपांकर मिश्रा ने कहा कि बिहार के सवालों को लेकर आईसा आगे बढ़ेगा। यह आंदोलन बिहार के शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के दिशा में आगे बढ़ेगा। बिहार में स्नातक को पढ़ाई में 7.5 सीजीपीए की बैरियर, पीएचडी में फीस वृद्धि को वापस लेने, नॉन नेट फेलोशिप को लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन बिहार में आगे बढ़ेगा।
आईसा की राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से राज्य की राजधानी पटना तक छात्रों का अभूतपूर्व उभार देखने को मिला है और दिल्ली से बिहार तक समाज के विभिन्न तबकों का व्यापक समर्थन आंदोलन को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि नफरत की राजनीति की आड़ में शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है जिसे इस बार देश का हर तबका ने चिन्हित कर लिया और निर्णायक लड़ाई लड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी मैदान में शांतिपूर्ण आंदोलन पुलिसिया बर्बरता का शिकार हुआ। कई छात्रों और युवाओं को 24 घंटे से अधिक समय तक बिना किसी सूचना के हिरासत में रखा गया तथा जो लोग आंदोलन में शामिल भी नहीं थे, उन्हें भी उठाकर प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि डराने-धमकाने और दमन की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक जनआंदोलन से दिया जाएगा।










