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तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी से गरमाई बिहार की सियासत, ’बिहारी बाबू’ ने सम्राट सरकार को घेरा, तेजप्रताप की जेल से रिहाई पर गुस्से में छात्र

On: July 31, 2026 2:52 AM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार सरकार की तरफ से जारी नोटिस के बाद लालू के बड़े लाल पूर्व मंत्री व नवोदित जनशक्ति जनता दल यानी जेजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव को राजधानी पटना स्थित बेऊर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। उनके अलावा 4 अन्य छात्रों को भी छोड़ दिया गया है। इन सभी के जमानत के कागजात मंगलवार यानी 28 जुलाई की देर शाम बेऊर सेंट्रल जेल प्रशासन के पास पहुंच गए थे और फिर उन्हें आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया। बेऊर सेंट्रल जेल अधीक्षक ने तेजप्रताप यादव सहित पांच को रिहा करने की पुष्टि की है।

मिली जानकारी के अनुसार, पहले 13 छात्रों को बेऊर सेंट्रल जेल से रिहा करने की खबर थी। कहा गया था कि इन 13 छात्रों की परीक्षा होने की वजह से जेल से रिहा किया जाएगा। लेकिन, सिर्फ 4 छात्रों को ही रिहा किया गया। साथ ही, तेजप्रताप यादव को भी छोड़ दिया गया। बेऊर सेंट्रल जेल के बाहर कई छात्र मौजूद थे, जो अपने दोस्तों के जेल से बाहर आने का इंतजार कर रहे थे। उन्हीं में से एक छात्र अपने दोस्त की रिहाई नहीं होने पर भड़क गया। उसने तेजप्रताप यादव को स्पेशल ट्रीटमेंट देने की बात कहीं। एक छात्र ने कहा, तेजप्रताप यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, इसलिए उन्हें सबसे पहले छोड़ दिया गया। बाकी छात्रों को नहीं छोड़ा गया। छात्र ने इस दौरान बताया कि किसे छोड़ा जाएगा किसे नहीं, यह अब तक क्लियर नहीं है। मेरे दोस्त को एग्जाम देने जाना है, ऐसे में कोई भी पुलिसकर्मी बात सुनने तक के लिए तैयार नहीं हैं।

लालू पुत्र पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव के खिलाफ गांधी मैदान थाने में केस दर्ज किया गया, जिसमें उन पर दंगा कराने और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए। इसके बाद तेजप्रताप यादव को बीते शनिवार को पटना में सिटी सेंटर मॉल से दोबारे हिरासत में ले लिया गया और देर रात बेऊर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इसके बाद सरकार ने प्रदर्शन के दौरान तमाम प्राथमिकी को रद्द करने का फैसला ले लिया। साथ ही, तेजप्रताप यादव की ओर से जमानत की अर्जी भी दाखिल की गई। कोर्ट ने तेजप्रताप यादव की जमानत याचिका को मंजूर कर ली। इसके बाद जमानत से संबंधित कागजात बेऊर सेंट्रल जेल पहुंच गए। इसके बाद जेल प्रशासन ने तेजप्रताप यादव को रिहा कर दिया।

वैसे, बिहार में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलता दिख रहा था। लालू पुत्र पूर्व मंत्री व जेजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर था। इसी बीच ’बिहारी बाबू’ के नाम से देश-दुनिया में मशहूर फिल्म अभिनेता से त्रिमूल कांग्रेस के सांसद बने शत्रुघ्न सिन्हा ने ऐसा बयान दिया, जिसने इस पूरे मामले को नई सियासी दिशा दे दी। शत्रुघ्न सिन्हा ने तेजप्रताप यादव की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए बिहार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की बात तक कह दी। उन्होंने बिहार में भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए कथित ‘समझौते’ की तर्ज पर मामले वापस लेने की मांग सरकार से कर डाली। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में विपक्षी एकजुटता का नया मुद्दा बनते देख बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में हुए ‘समझौते’ पर हामी भर दी और बिहार में छात्र आंदोलन के बाद गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब राजधानी पटना स्थित गांधी मैदान थाने से 82 छात्रों का रिलीज ऑर्डर जारी हो चुका है। वहीं, बेऊर सेंट्रल जेल के बाहर परिजनों का इंतजार जारी हैं।

छात्रों के आंदोलन से आगे बढ़कर बिहार के आगामी राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़ती दिखाई देने लगी। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष भी सामने है। तेजप्रताप यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर में दंगा करने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने, पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाने, सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने और थाना प्रभारी को चोट पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप तक लगे हैं।

बिहार बंद के बाद पुलिस की कार्रवाई का दायरा भी बढ़ा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, राज्यभर में करीब 358 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। इससे छात्रों के आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव का मुद्दा और गंभीर हो गया है। तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी ने बिहार में एक ऐसा राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। हालांकि, कोर्ट से मिली जमानत पर तेजप्रताप यादव सहित चार छात्र जेल से रिहा हो चुके हैं। लेकिन, आंदालनकारी छात्र अभी भी जेल की सलाखों के पीछे कैद हैं।

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार द्वारा छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने के वादे को पूरा न करने का आरोप लगाया है। सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपने वादे से पीछे हटती है, तो देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की जाएगी। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने छात्रों व प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने तथा भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया था। लेकिन, अब तक इसका लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है। सौरव दास ने कहा कि ’सरकार ने शनिवार को पूरे देश के सामने हमें यह गारंटी दी थी कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में दिल्ली ही नहीं, बल्कि किसी भी भाजपा या एनडीए शासित राज्य में किसी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। इसकी समयसीमा मंगलवार तय की गई थी। लेकिन, अब तक हमें इसका लिखित आश्वासन नहीं मिला है।’

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