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बनारस में अपराधी प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के नाम का ले रहे हैं सहारा.

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प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक लगातार प्रदेश की जनता की समस्याओं को ख़त्म करने का प्रयास कर रहे है. इसके लिए सबसे पहले उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सुबह उठने के बाद भगवान की पूजा करते हैं, तत्पश्चात प्रदेश की जनता की समस्याओं का समाधान करते हैं. यह सारी प्रक्रिया उपमुख्यमंत्री जी अपने ही आवास पर करते हैं. प्रतिदिन प्रदेश भर के फरियादी आवास पर आते हैं और खुश होकर चले जाते हैं.


लेकिन आज एक ऐसा मामला सामने आया है जहां उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. बनारस से आए रोहनिया थाना क्षेत्र के शाहावाबाद निवासी अरविंद भारद्वाज ने करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने का आरोप लगया है, अपराधी पुलिस से बचने के लिए प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का नाम ले रहे हैं. इस वजह से बनारस की पुलिस भी कुछ नहीं कर पा रही है। बनारस से लखनऊ पहुंचे अरविंद भारद्वाज ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से उनके आवास पर मुलाकात कर उचित जांच और कार्यवाही करने की मांग की है, इतना ही नहीं उपमुख्यमंत्री ने इस पूरे प्रकरण पर उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया है.

रोहनिया थाना क्षेत्र के शाहावाबाद निवासी अरविंद भारद्वाज ने करोड़ों रुपये मूल्य की अपनी पुश्तैनी संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने का आरोप लगाया है.

पुलिस कमिश्नर के कार्रवाई संबंधी निर्देश के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। स्वर्गीय दान बहादुर सिंह की मृत्यु के बाद कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां वैधानिक उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज हुई थीं। आरोप है कि कुछ लोगों ने आपसी मिलीभगत कर वास्तविक हिस्सेदारी से अधिक भूमि अपने नाम दर्शाते हुए कूटरचित अभिलेख तैयार किए और उसी के आधार पर करोड़ों रुपये की जमीन व भवन का बैनामा करा दिया। पीड़ित का आरोप है कि रोहनिया क्षेत्र स्थित लगभग 12 हजार वर्गफुट से अधिक भूमि तथा उस पर बने तीन मंजिला भवन से जुड़े सौदों में बड़े पैमाने पर जालसाजी की गई। संबंधित संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य करीब 3.85 करोड़ रुपये है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आजाद कुमार भारद्वाज समेत कई लोगों ने यह जानते हुए भी भूमि खरीदी कि विक्रेताओं का स्वामित्व सीमित था और वे पूरी संपत्ति बेचने के अधिकारी नहीं थे। इस मामले की शिकायत उन्होंने 10 जनवरी 2026 को रोहनिया थाने में की थी। बाद में पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की गई। आरोप है कि पुलिस कमिश्नर के निर्देश के बावजूद अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और न ही किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि मामले के कुछ आरोपी राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित कर रहे हैं। उनका दावा है कि आरोपी उपमुख्यमंत्री का नाम आगे रखकर कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर पुलिस भी प्रभावी कदम उठाने से बच रही है। हालांकि, इस संबंध में किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अरविंद भारद्वाज ने उपमुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई है और उपलब्ध दस्तावेजों व तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बनारस में जिस तरीके से योगी सरकार की छवि खराब की जा रही है, अपराधियों पर उचित कार्रवाई होना अति आवश्यक है. बनारस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है जिस मायने यह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. बनारस की पुलिस भी यह पता लगाने में असफल हो रही है कि यह व्यक्ति उपमुख्यमंत्री के संपर्क में है भी या नहीं. जनवरी की शिकायत 5 महीने बीत जाने के बाद भी कोई भी कार्यवाही बनारस की पुलिस नहीं कर पा रही है. फिलहाल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने संबंधित पूरे मामले की जांच बनारस जिलाधिकारी को सौंप दी है।

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