लखनऊ (हरिमोहन श्रीवास) उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से एक बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाला महाघोटाला सामने आया है। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में गरीब और कैंसर से पीड़ित गंभीर मरीजों के लिए चलाई जा रही उत्तर प्रदेश सरकार की ‘असाध्य रोग योजना’ में करोड़ों रुपये का डाका डाला गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जो मरीज दम तोड़ चुके थे, या जो अस्पताल में कभी भर्ती ही नहीं हुए, उनके नाम पर कागजों में बेहद महंगे कैंसर और प्रोटीन के इंजेक्शन जारी करवाकर उन्हें ब्लैक मार्केट में बेच दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष (HOD) प्रोफेसर अपुल गोयल को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा मुख्य फार्मासिस्ट को निलंबित कर दिया गया है और दवा काउंटर पर तैनात तीन संविदा कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करते हुए चौक थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
ऐसे खुला भ्रष्टाचार का खेल : यह पूरा घोटाला तब पकड़ में आया जब केजीएमयू प्रशासन की आंतरिक ऑडिट टीम ने यूरोलॉजी विभाग के मासिक दवा खर्च में अप्रत्याशित उछाल देखा। अक्टूबर-नवंबर 2025 तक जिस विभाग का दवाओं का मासिक खर्च करीब 10 लाख रुपये हुआ करता था, वह फरवरी 2026 में बढ़कर 40 लाख और मार्च 2026 में 45 लाख रुपये के पार पहुंच गया। मात्र 4-5 महीनों में खर्च में चार गुना से अधिक की बढ़ोतरी देखकर कुलपति (VC) प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने 5 सदस्यीय विशेष जांच कमेटी का गठन किया।
जांच में हुए रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे : जून 2026 की शुरुआत में आई जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए, उसने केजीएमयू प्रशासन के होश उड़ा दिए:
- मृत मरीजों के नाम पर लूट: कई ऐसे मरीजों के नाम पर 8,000 से 10,000 रुपये कीमत वाले महंगे इंजेक्शन जारी दिखाए गए, जिनकी मृत्यु हफ्तों पहले हो चुकी थी।
- इंजेक्शन की ओवरडोज का फर्जी खेल: जो कैंसर इंजेक्शन चिकित्सकीय मानकों के अनुसार किसी मरीज को 6 महीने में केवल एक बार दिया जाना चाहिए था, रिकॉर्ड बुक में उसे 1 महीने के भीतर 4 से 5 बार देना दर्ज किया गया।
- करोड़ों की चपत: शुरुआती ऑडिट में यह घोटाला करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये का पाया गया है, जिसके और बढ़ने की आशंका है।
सुरक्षा में चूक और चोरियों का पुराना रिकॉर्ड : कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद के अगस्त 2023 में कार्यभार संभालने के बाद से केजीएमयू लगातार विवादों और चोरियों को लेकर सुर्खियों में रहा है। साल 2024 में लॉरी कॉर्डियोलॉजी विभाग से करीब 40 लाख रुपये कीमत के 39 इंफ्यूजन पंप चोरी हो गए थे। इसके बाद साल 2025 में चोरों ने दुस्साहस दिखाते हुए खुद कुलपति (VC) के सुरक्षित आधिकारिक आवास परिसर में घुसकर 50 साल पुराना लाखों रुपये की कीमत का चंदन का पेड़ रातभर में काटकर गायब कर दिया था। इस मामले में हाल ही में अप्रैल 2026 में सुरक्षा एजेंसी पर 19 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया था।
इस महाघोटाले के सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने दवाओं के वितरण की व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। अब एम्स (AIIMS) की तर्ज पर मरीजों के मोबाइल पर ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन के बाद ही दवाएं दी जाएंगी। साथ ही बिचौलियों को खत्म करने के लिए असाध्य रोग योजना की राशि को सीधे मरीजों के बैंक खातों में (DBT के जरिए) भेजने की तैयारी की जा रही है। पुलिस और केजीएमयू प्रशासन अब आरोपी कर्मचारियों और वेंडर एजेंसी से इस घाटे की आर्थिक रिकवरी में जुटा है, वहीं जांच का दायरा बढ़ाते हुए केजीएमयू के अन्य कैंसर विभागों (रेडियोथेरेपी और ऑनकोसर्जरी) के पिछले रिकॉर्ड्स का भी ऑडिट शुरू कर दिया गया है।











