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भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर कानूनी नोटिस

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लखनऊ : पशु एवं ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता एवं उत्तर प्रदेश ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की राज्य कार्यकारिणी सदस्य एवं सलाहकार देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति एवं कुलसचिव को औपचारिक कानूनी नोटिस जारी कर विश्वविद्यालय में ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए समान अवसर, भेदभाव-रहित प्रवेश व्यवस्था, समावेशी शिक्षा, सुरक्षित छात्रावास एवं प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

कानूनी नोटिस में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार केवल कागजी मान्यता तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि उन्हें शिक्षा एवं सार्वजनिक संस्थानों में वास्तविक और समान अवसर मिलना आवश्यक है। नोटिस में NALSA बनाम भारत संघ (2014) के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला देते हुए समानता, गरिमा और लैंगिक पहचान के संवैधानिक अधिकारों को रेखांकित किया गया है।

नोटिस में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 तथा ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए तथा उनके लिए समावेशी शिक्षा और शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।

वर्ष 2025 के Jane Kaushik बनाम Union of India मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए प्रवेश एवं परीक्षा प्रपत्रों में “Third Gender” विकल्प, लैंगिक पहचान का सम्मान, समान शैक्षणिक अवसर, युक्तिसंगत सुविधा, जेंडर-समावेशी सुविधाएं तथा प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

विश्वविद्यालय से प्रमुख मांगें

देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने विश्वविद्यालय से एक व्यापक “Transgender Equal Opportunity and Inclusion Policy” बनाने और लागू करने की मांग की है। इसके अंतर्गत प्रवेश एवं परीक्षा फॉर्म में स्पष्ट Third Gender/Transgender विकल्प, आत्म-पहचान के आधार पर लैंगिक पहचान का सम्मान तथा ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

इसके अलावा ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए आरक्षण एवं सकारात्मक कार्रवाई की वर्तमान व्यवस्था को स्पष्ट करने, समान अवसर नीति लागू करने और Complaint/Grievance Officer नियुक्त करने की मांग की गई है।

छात्रावास के संबंध में नोटिस में सुरक्षित, सम्मानजनक और गैर-भेदभावपूर्ण आवास की मांग की गई है। विश्वविद्यालय से ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए जेंडर-समावेशी या अन्य उपयुक्त आवासीय व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार करने को कहा गया है।

नोटिस में शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों, छात्रावास एवं सुरक्षा कर्मियों के लिए ट्रांसजेंडर अधिकारों और लैंगिक विविधता पर संवेदनशीलता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा विद्यार्थियों के चुने हुए नाम, लैंगिक पहचान और सर्वनाम का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।

पांच दिन में जवाब की मांग

कानूनी नोटिस में विश्वविद्यालय से नोटिस प्राप्त होने के पांच दिनों के भीतर लिखित जवाब देने की मांग की गई है। साथ ही विश्वविद्यालय की वर्तमान ट्रांसजेंडर प्रवेश नीति, आरक्षण/सकारात्मक कार्रवाई की व्यवस्था, छात्रावास एवं युक्तिसंगत सुविधाओं तथा शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होता अथवा विश्वविद्यालय द्वारा प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तो सक्षम प्रशासनिक, वैधानिक एवं न्यायिक मंचों के समक्ष उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रस्तावित कार्रवाई में समान अवसर, समावेशी प्रवेश, आरक्षण/सकारात्मक कार्रवाई, सुरक्षित छात्रावास, शिकायत निवारण और संस्थागत संवेदनशीलता से संबंधित निर्देशों की मांग शामिल हो सकती है।

देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने कहा कि यह पहल संवैधानिक समानता, गरिमा, सामाजिक न्याय तथा ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को भेदभाव और बहिष्कार से संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने विश्वविद्यालय से मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय सीमा में सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

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