लखनऊ – डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों में दिव्यांगजनों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से आधी सीटें दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए निर्धारित हैं। यह बातें जौनपुर विकास भवन में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी राजेश कुमार नायक के नेतृत्व में दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि शकुन्तला विवि के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहीं।
विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थियों से ट्यूशन फीस, हॉस्टल शुल्क और भोजन शुल्क नहीं लिया जाता है, जिससे आर्थिक बाधाएं उनकी शिक्षा में रुकावट न बनें। विश्वविद्यालय के डेफ कॉलेज में श्रवण एवं वाक् बाधित विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षण व्यवस्था के साथ निःशुल्क उपचार और परामर्श सुविधाएं उपलब्ध हैं। वहीं विश्वविद्यालय के कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र में दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
विशिष्ट अतिथि वाराणसी मंडल दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की उपनिदेशक मीनू सिंह ने दिव्यांगजनों के लिए संचालित उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के डिप्टी डायरेक्टर (एडमिशन) डॉ. दुष्यंत त्यागी ने कहा कि विश्वविद्यालय का समावेशी वातावरण दिव्यांग विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करता है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक साबित होता है।

संगोष्ठी में जिले की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों, जिला विद्यालय निरीक्षक, समाज कल्याण अधिकारी, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी और शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेष रूप से कक्षा आठ के बाद दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा, करियर मार्गदर्शन और उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार सैनी, डॉ. संजय मिश्रा, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राहुल राजभर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।












