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पटना में तीन दिवसीय आम महोत्सव शुरू, आम महोत्सव में दिखीं अनोखी व दुर्लभ किस्में  

On: June 20, 2026 2:10 AM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। राजधानी पटना के बामेती परिसर में शुक्रवार से आयोजित तीन दिवसीय आम महोत्सव की शुरुआत हुई। जहां महोत्सव में आम की 60 से ज्यादा प्रजातियों को प्रदर्शित किया गया है। हर किस्म के आम का अपना अलग रंग, स्वाद, सुगंध और पहचान है। इस आम महोत्सव में रोमियोटाकिस, टामीएटकिन, स्वर्ण रेखा, ईरविन, लालमोहन और मल्लिका जैसी किस्में आकर्षण का केंद्र बनी हैं। पूर्वी बिहार के भागलपुर का जर्दालू व दीघा का मालदा आम भी लोगों को खूब लुभा रहे हैं। पूरे बामेती परिसर में आमों की प्राकृतिक खुशबू वातावरण को महका रही है।

प्रदर्शनी में आमों की टोकरियों को कलात्मक ढंग से सजाया गया है। स्टॉलों के पास पहुंचते ही ताजे आमों की सुगंध महसूस होती है। प्राकृतिक खुशबू किसी भी कृत्रिम इत्र को चुनौती देती नजर आती है। चिकनी सतह और आकर्षक रंग आमों की खूबसूरती बढ़ाते हैं। आम प्रेमी विभिन्न किस्मों को करीब से देखकर आनंद ले रहे हैं। आम महोत्सव का माहौल स्वाद व सुगंध से सराबोर है। इस आम महोत्सव में कई लोकप्रिय किस्मों के आम खरीदने की भी सुविधा है। यहां आम किलो नहीं, बल्कि पेटी के हिसाब से बेचे जा रहे हैं। प्रत्येक पेटी का वजन लगभग 3.500 किलोग्राम है। केसर आम की एक पेटी की कीमत 1,100 रुपये रखी गई है। जर्दालू आम की एक पेटी 500 रुपये में उपलब्ध है।

मालदा व गुलाब खास की पेटी 400 रुपये में मिल रही है। मल्लिका आम नीलम और दशहरी किस्मों के संकरण से विकसित हुआ है। इसके फल बड़े व भारी होते हैं। इसका वजन 283 से 700 ग्राम तक होता है। इसमें 23 से 27 ब्रिक्स तक चीनी की मात्रा पाई जाती है। इसी कारण इसका स्वाद बेहद मीठा माना जाता है। इसमें फ्लावोनोइड्स की मात्रा भी ज्यादा होती है। यह जुलाई माह के अंत में पकने वाली देर से तैयार होने वाली किस्म है। अमर इब्राहिम आम बिहार के बगीचों में पाया जाता है। इसे अक्सर जर्दालू और बंबई आम के साथ उगाया जाता है। इस किस्म के बारे में वैज्ञानिक जानकारी अपेक्षाकृत कम उपलब्ध है। वहीं, तोतापुरी आम अपने तोते की चोंच जैसे आकार के कारण प्रसिद्ध है। यह मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में उगाया जाता है। जूस, पल्प, अचार व आम पापड़ बनाने में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।

महमूद बहार एक विशेष हाइब्रिड आम की किस्म है। यह अपने उत्कृष्ट स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। इसे इंडियन मैंगो मेनिया 2025 में भी प्रदर्शित किया गया था। प्रभाशंकर दुनिया का पहला योजनाबद्ध हाइब्रिड आम माना जाता है। इसका औसत वजन लगभग 332 ग्राम होता है। यह 6 से 9 दिनों तक ताजा बना रहता है। जवाहर आम का गूदा घना और मजबूत होता है। पकने के बाद भी इसकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है। इसी कारण इसे दूर-दराज के बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इसमें सबसे ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। लगातार अच्छी उपज देने की क्षमता किसानों को अधिक आकर्षित करती है। यही वजह है कि यह किस्म खेती के लिए काफी पसंद की जाती है।

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