बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार की राजधानी पटना में मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि, इस वर्ष 2 जून की रात हुई फायरिंग की घटना में पुलिस की केस डायरी ने उनके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, गोलीबारी आत्मरक्षा में नहीं, बल्कि इलाके में दहशत फैलाने के उद्देश्य से की गई थी। इस मामले में 20 जून की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्योंकि, इसी दिन खान सर की गिरफ्तारी पर लगी रोक की अवधि समाप्त हो रही है।और उनके बॉडीगार्ड की जमानत याचिका पर भी सुनवाई होनी है। कोचिंग संस्थान के निकट हुई फायरिंग के वायरल वीडियो के आधार पर कदमकुआं थाना की पुलिस ने खान सर और उनके दो बॉडीगार्ड के खिलाफ बीएनएस और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं में 4 जून को कदम कुआं थाना में कांड संख्या 418/2026 दर्ज किया है।

घटना के बाद शुरुआती स्तर पर खान सर की ओर से सुरक्षा कर्मियों द्वारा फायरिंग किए जाने की बात सामने नहीं लाई गई थी। उनके मैनेजर की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में भी गोलीबारी का कोई उल्लेख नहीं था। हालांकि, पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर दोनों बॉडीगार्ड दीपक कुमार और तालेबर सिंह फायरिंग करते दिखाई दिए। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद खान सर की ओर से फायरिंग को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया गया था। लेकिन, पुलिस की केस डायरी के मुताबिक, मारपीट और तोड़फोड़ की घटना 2 जून की रात 10.10 बजे हुई थी। जबकि, गोलीबारी करीब 20 मिनट बाद रात 10.30 बजे की गई। इसी समय अंतर को आधार बनाकर पुलिस ने आत्मरक्षा के दावे को खारिज कर दिया है। पुलिस के बयान के आधार पर खान सर और उनके दोनों बॉडीगार्ड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हिरासत में लिए गए दीपक कुमार और तालेबर सिंह ने कथित रूप से पुलिस को बताया है कि उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि खान सर के निर्देश पर गोली चलाई थी। अदालत ने पुलिस को 20 जून या उससे पूर्व हर हाल में केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, आत्मरक्षा का दावा स्वीकार कराने के लिए यह साबित करना आवश्यक होगा कि घटना के वक्त तत्काल जान का गंभीर खतरा था और हमलावरों के पास ऐसे हथियार थे, जिनसे अनहोनी की आशंका थी।
दूसरी ओर, ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद ने पुलिस पर शिकायत के बावजूद मामला दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। उनके वकील निरंजन कुमार सिंह के अनुसार, इस मामले में अब कार्ट में सीधे परिवाद (कंप्लेंट केस) दायर किया जाएगा। वहीं, रौशन आनंद ने कदमकुआं थाने में 3 पन्नों का लिखित आवेदन देकर फैजल खान उर्फ खान सर और कोल्ड स्टोरेज के मालिक डॉ.आर.एस. प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके भाई प्रिंस यादव की नेपाल में साजिश के तहत हत्या कराई गई। साथ ही, यह भी आरोप लगाया कि जेल में बंद दीपक कुमार और तालेबर सिंह के माध्यम से उनकी भी हत्या की साजिश रची गई थी। हालांकि, इन आरोपों पर अभी पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

इधर, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पटना में कोचिंग संस्थानों को लेकर हुए विवाद और दर्ज प्राथमिकी के बाद प्रिंस यादव काफी तनाव में थे। नेपाल में हिरासत में लिए गए दोस्तों ने वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया। उनका कहना था कि गिरफ्तारी की आशंका और लगातार बढ़ते दबाव के कारण वह काफी तनाव में थे। वह 3 जून को अपने कुछ करीबी साथियों के साथ नेपाल के विराटनगर चले गए थे। वहां पहले मेट्रो सिटी होटल में ठहरे और बाद में बाईपास के पास शुभ होटल के कमरा नंबर 102 में शिफ्ट हो गए। प्रिंस यादव के साथ नेपाल गए दोस्तों के मुताबिक, घटना वाले दिन उन्होंने भोजन किया और नियमित दवा लेने के बाद कमरे में आराम करने चले गए। दोस्तों का दावा है कि प्रिंस मानसिक तनाव की दवाइयां लेते थे। जब वे सो रहे थे, तब कुछ साथी बाहर घूमने निकल गए। जबकि, दो लोग कमरे में मौजूद थे। दोस्तों के मुताबिक, कुछ देर बाद प्रिंस की सांसें असामान्य रूप से चलने लगीं। कमरे में मौजूद साथियों ने तत्काल अन्य दोस्तों को सूचना दी। एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल मौत के कारणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। लेकिन, आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। नेपाल पुलिस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह स्वाभाविक मौत थी, किसी बीमारी का परिणाम थी या फिर इसके पीछे कोई साजिश थी। यह तो वक्त आने पर पता चल सकता है।
उधर, राजधानी पटना में खान सर और रौशन आनंद के बीच चल रहे विवाद के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा संकेत दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि पटना शहर में चल रहे कोचिंग संस्थानों के लिए एक अलग और व्यवस्थित केंद्र विकसित किया जाएगा। इसके लिए कोचिंग संस्थानों को शहर से बाहर बसाने की योजना पर काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बिहार का गौरवशाली इतिहास रहा है। ऐसे में कोचिंग संस्थानों को भी बेहतर माहौल और सुविधाएं मिलनी चाहिए। नगर विकास एवं आवास विभाग की विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि पटना में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का एक ऑर्गनाइज्ड सेंटर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों को शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके से बाहर एक स्थान पर स्थापित किया जाए। सरकार वहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। इससे छात्रों को भी बेहतर माहौल मिलेगा और ट्रैफिक व भीड़ की समस्या भी कम होगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बिहार के दो चर्चित कोचिंग संचालकों के बीच विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। सरकारी नौकरी में सफलता को लेकर शुरू हुई क्रेडिट की लड़ाई धीरे-धीरे सड़क, थाना, कोर्ट व जेल तक पहुंच गई। 2 जून की रात को खान ग्लोबल स्टडीज में तोड़फोड़ और मारपीट की घटना हुई थी। इस मामले में कदमकुआं थाना में 3 जून को बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत कांड संख्या 410/26 के रूप में प्राथमिकी खान ग्लोबल स्टडीज के कर्मचारी की ओर से दर्ज कराई गई है। इस मामले में पुलिस ने रौशन आनंद, अभिषेक कुमार एवं गौरव कुमार को गिरफ्तार कर 3 जून को ही जेल भेज दिया था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें खान सर को लेकर भी आरोप लगाए गए। मामले में उनके दो बॉडीगार्ड दीपक कुमार और तालेबर सिंह जेल चले गए और खान सर पर भी गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा। हालांकि, कोर्ट से उन्हें राहत मिल गई। लेकिन, जेल से बाहर आने के बाद रौशन आनंद ने खान सर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप लगातार चर्चा में हैं।








