बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। जन संस्कृति मंच यानी जसम का 7वां बिहार राज्य सम्मेलन समस्तीपुर के रामचंद्र आरसी नगर में संपन्न हुआ। जहां समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर के सभागार में 26 एवं 27 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय राज्य सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध जनकवि मदन कश्यप ने किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि-कथाकार-आलोचक जितेंद्र कुमार, कवि-आलोचक प्रो.सुरेंद्र प्रसाद सुमन, बुद्धिजीवी प्रो.संतोष कुमार और उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो.अहमद सगीर की अध्यक्ष मंडली ने की। जबकि, संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी-कवि दीपक सिन्हा ने किया। राज्य सम्मेलन की शुरूआत शहीद-ए-आजम भगत सिंह एवं संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर के मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद शहीद गीत के साथ समस्तीपुर कॉलेज के सभागार में शुरू हुआ। जहां राज्य सम्मेलन का मंच जनकवि सुरेंद्र प्रसाद व सभागार जनकवि महेश्वर के नाम पर रखा गया था। वहीं, दो दिवसीय कार्यक्रम के राज्य सम्मेलन स्थल का नाम रामचंद्र राय-रामचंद्र आरसी नगर रखा गया। राज्य सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रसिद्ध जनकवि मदन कश्यप ने कहा कि फासीवादी प्रवृतियों का हमें जीवन के हर स्तर पर विरोध करना चाहिए और सभी तरह के सुप्रीमों संस्कृति के विरूद्ध लोकतांत्रिक व जनवादी केन्द्रीयता की परम्परा को कायम रखने के लिए सदैव संघर्ष करना चाहिए। वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थिति में हमें खतरे को पहचानने और उनसे निपटने का एक मात्र तरीका जनता का आंदोलन है।
समस्तीपुर में आयोजित इस दो दिवसीय राज्य सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता लखनऊ से पधारे जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं कवि-आलोचक कौशल किशोर ने कहा कि फासीवाद के भारतीय संस्करण से संघर्ष के लिए भगत सिंह हमारे पथ प्रदर्शक हैं जो फासी के फंदे को चुमने से पहले लेनिन को पढ़ रहे थे। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ से पधारे जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध आलोचक सियाराम शर्मा ने कहा कि भारतीय फासीवाद टेक्स्टबुक फासीवाद है जिसका खात्मा जनता की चेतना को समृद्ध अथवा प्रगतिशील व वैज्ञानिक बनाए बगैर संभव नहीं है, जिसके लिए जन संस्कृति मंच जैसे संगठन का महत्व व कार्यभार और भी बढ़ जाता है। जबकि, बतौर मुख्य अतिथि जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने राज्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में जेनजी आंदोलन ने फासीवादी सत्ता के प्रचार के तरीकों को मात देते हुए लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की आजादी और प्रगतिशील विचारों को प्रतिस्थापित किया है। स्वागत भाषण कवि सह जसम के समस्तीपुर जिलाध्यक्ष डॉ.प्रभात कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि कलाकारों और लेखकों को जनसाधारण के फासीवद के खिलाफ संघर्ष को अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने जनतंत्र को खतरे में बताते हुए कहा कि सत्ताधारियों द्वारा इसे नष्ट कर देने की साजिश को शिकस्त देने में उन्हें जनसाधारण के साथ होना चाहिए। स्वतंत्रता, न्याय और बराबरी के लिए संघर्ष को भी उनकी जरूरत है।

इस अवसर पर सांस्कृतिक संध्या में कवि गोष्ठी एवं मुशायरे का भी आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जसम के राज्य सह सचिव सुमन कुमार सिंह ने की। जबकि, संचालन वरिष्ठ कवि शंभु भारतीय ने किया। कवि गोष्ठी में एक से बढ़कर एक कविताओं और शेरो-शायरी की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने जमकर वाह-वाह की और तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंजता रहा। मदन कश्यप की कविता ’’चांद क्यूं नज़्म’’, अनिल अंशुमन की कविता ’’क्यों जल रहे हैं रोज मकानात शहर में’’, कौशल किशोर की कविता ’’एक पिता का ब्यान’’ की तारीफ हुई। डॉ.प्रभात कुमार ने अपनी कविता ’’बुलडोजर! बुलडोजर’’ का पाठ कर फासीवादी सत्ता पर करारा प्रहार किया। इसके पहले कि तेरा घर टूटे, चोर हत्यारा तुमको लूट, तोड़ दो इसका अंजर-पंचर, नहीं हो तुम मदारी के बंदर। वहीं, मो.सगीर के मुशायरे ने भी श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया और उनकी प्रस्तुति को खूब सराहना मिली। कवि गोष्ठी एवं मुशायरे में 25 से अधिक कवियों और शायरों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। कविता, गजल और शेरो-शायरी की विविध प्रस्तुतियों ने राज्य सम्मेलन की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य-प्रेमी, सांस्कृतिक कार्यकर्ता एवं राज्य सम्मेलन में आए प्रतिनिधि आदि मौजूद रहे।
राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को सुबह सांगठनिक सत्र का आयोजन किया गया। मंच पर बतौर पर्यवेक्षक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर, राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार आदि विराजमान थे। सत्र की अध्यक्षता जीतेंद्र कुमार, तबस्सुम फरहाना, अनील अंशुमन, प्रो.सुरेंद्र प्रसाद सुमन, रामबाबू आर्य की अध्यक्ष मंडली ने की। विदाई राज्य कमिटी द्वारा 125 सदस्यीये नई राज्य परिषद का गठन करने का प्रस्ताव पर्यवेक्षक कौशल किशोर ने हाऊस के समक्ष रखा जिसे उपस्थित डेलीगेट ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ पास कर दिया। इसमें 45 सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया। मौके पर नवगठित राज्य परिषद ने बैठक कर सर्वसम्मति से जीतेंद्र कुमार को राज्य अध्यक्ष तथा दीपक सिन्हा को राज्य सचिव चुना है।
जसम के राज्य सम्मेलन में बेगूसराय की प्रसिद्ध टीम रंगनायक-द लेफ्ट थियेटर द्वारा लोककथा पर आधरित नाटक ’राजा के दो सिंग’ का मंचन हुआ। इसका निर्देशन दीपक सिन्हा ने किया। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। भोजपुर और मिथिला जोन से कई जनगायक अपनी प्रस्तुति दिए। मधुबनी की जनगायन टीम नवतुरिया, रोहतास की टीम ललकार और आरा की चर्चित युवा टीम युवानीति की विशेष प्रस्तुति भी हुई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन प्रमोद यादव, विजय सिन्हा एवं पुनीत पाठक कर रहे थे। राज्य सम्मेलन में डेलीगेट, पर्यवेक्षक और अतिथियों सहित लगभग 125 से अधिक रंगकर्मी, साहित्यकार, कलाकार, चित्रकार और जनगायक सम्मेलन में बतौर डेलीगेट मौजूद थे। इस अवसर पर दीपक सिन्हा के नये काव्य-संग्रह ’’ब्लैक स्पॉट’’ का लोकार्पण भी किया गया।










