बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार यानी 25 सितंबर से देशभर में आन्दोलन शुरू हो गया है। शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना में राज्य चुनाव आयोग के दफ्तर पर प्रदर्शन करने जा रहे बिहार कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं को पटना सचिवालय थाना के गेट के पास पुलिस ने रोक दिया। जहां बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक कार्रवाई का सामना किया और घंटों डटे रहे।
पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा रखते हुए प्रदर्शनकारियों को थाने के समीप ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। जिससे कांग्रेस कार्यकर्ता आगे नहीं बढ़ सके और वहीं पर अपनी मांगों को लेकर घंटों अड़े रहे। इस दौरान वाटर कैनन की बौछार से वाटर कैनन का पानी तक खत्म हो गया। लेकिन, बिहार कांग्रेस के कार्यकर्ता नहीं हटे।
राजद की ओर से भी राज्य की राजधानी पटना सहित सम्पूर्ण बिहार में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर पुतला दहन किया गया। राजधानी पटना स्थित इनकम टैक्स गोलंबर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन पटना जिला राजद अध्यक्ष दीनानाथ सिंह यादव के नेतृत्व में किया गया।

इस अवसर पर राजद के नेता एजाज अहमद ने बताया कि संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एवं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के आह्वान पर पूरे राज्यभर में जिला मुख्यालयों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में राजद नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने बताया कि राजधानी पटना में वीरचंद पटेल पथ स्थित राजद कार्यालय से जुलूस नारा लगाते हुए निकला और वीरचंद पटेल पथ होते हुए इनकम टैक्स गोलंबर पर पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने बिहार व पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों के चुनाव को रद्द किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि किस तरह से एसआईआर के नाम पर फर्जीवाड़ा करके सत्तापक्ष एनडीए को जितवाने में चुनाव आयोग की अहम भूमिका रही है और यह बातें स्पष्ट रूप से सामने आ गया कि किस तरह से बिहार के चुनाव को प्रभावित करने के लिए मतदान के दिन तक 10-10 हजार रुपये महिलाओं के खाते में ट्रांसफर किए गए। लेकिन, भारत निर्वाचन आयोग ने एक्शन नहीं लिया।
उधर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माक्शवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य सहित सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य की गिरफ़्तारी की निंदा की है। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, देश के चर्चित पत्रकार रहे सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, अंजलि भारद्वाज, अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा, राजीव डिमरी, रवि राय सहित कई अन्य नागरिक शामिल हैं।

भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने शांतिपूर्ण नागरिक प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार की रक्षा के लिए उठ रही आवाजों को पुलिसिया कार्रवाई के जरिये दबाया नहीं जा सकता। चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के खुलासे के बाद कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर होनी चाहिए। लेकिन, उन्हें गिरफ्तार करने की बजाए विपक्ष के नेताओं को ही गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वोट चोरी के खिलाफ और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भाकपा-माले एवं नागरिकों का संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक प्रतिरोध को रोक नहीं सकती। भाकपा-माले ने नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और वोट चोरी के खिलाफ संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया है।
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी भाकपा के राज्य सचिव व पूर्व विधायक रामनरेश पांडेय ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर अब राज्यव्यापी आंदोलन चलाया जायेग। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के मौके पर जनसंगठनों द्वारा आयोजित लोकभवन (राजभवन) मार्च भी प्रमुख मुद्दा रहेगा। साथ ही, 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे बिहार में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जायेंगे। भाकपा की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाए। एसआईआर प्रक्रिया को रोका जाए। मतदाता सूचियों से गलत तरीके से बाहर किए गए सभी लोगों के मतदान अधिकार फिर से बहाल किए जायें। भारत निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल की जाय। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को बदलकर ऐसी व्यवस्था लागू की जाय, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित चयन समिति पर आधारित हो। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।











