अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अमित कुमार घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश की जनता को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जहां भारत सरकार से धनराशि प्राप्त होने में विलम्ब हो रहा हो, वहां आवश्यकतानुसार राज्य बजट से धनराशि की व्यवस्था कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहे।
अपर मुख्य सचिव ने ये निर्देश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश की कार्यकारी समिति की 139वीं बैठक में दिए। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों, सेवा प्रदाताओं के भुगतान, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा आकांक्षात्मक ब्लॉकों में स्वास्थ्य संकेतकों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान आकांक्षात्मक ब्लॉकों में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित विभिन्न इंडीकेटर्स की भी समीक्षा की गई। उन्होंने चार इंडीकेटर्स में स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं में प्रगति सुनिश्चित करने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन इंडीकेटर्स के लिए प्रभावी माइक्रो प्लान तैयार किया जाए और उसके क्रियान्वयन की मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) के स्तर से नियमित समीक्षा कर प्रगति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि आकांक्षात्मक ब्लॉकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं गुणवत्ता में सुधार के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना बनाकर उसका समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए तथा प्रत्येक स्तर पर परिणामों की निगरानी की जाए।
विभिन्न सेवाओं के लिए चयनित सेवा प्रदाताओं के भुगतान में हो रहे विलम्ब पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि सेवा प्रदाताओं के भुगतान में किसी भी प्रकार का अनावश्यक विलम्ब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी सेवा प्रदाताओं का भुगतान समयबद्ध एवं नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाए। भुगतान में विलम्ब से कार्यों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए इस व्यवस्था में तत्काल सुधार लाया जाए।
अपर मुख्य सचिव ने विशेष सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान यह विशेष रूप से देखा जाए कि भुगतान से संबंधित पत्रावलियां किस स्तर पर और किन कारणों से लम्बित रहती हैं तथा अनावश्यक विलम्ब के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए।
लम्बे समय से एक ही पद पर तैनात कार्मिकों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कार्मिकों द्वारा अपने कार्यों में अपेक्षित रुचि नहीं ली जा रही है, उनके संबंध में आवश्यक कार्रवाई करते हुए अन्यत्र स्थानांतरण पर विचार किया जाए।
अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए आउटकम-बेस्ड डिसीजन मेकिंग पर विशेष जोर देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महानिदेशालय के अधिकारी एवं संबंधित जीएम नियमित सम्पर्क एवं समन्वय में रहें और भुगतान से संबंधित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें।
प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को प्रत्येक 15 दिन में संयुक्त निदेशकों एवं जीएम के साथ बैठक कर भुगतान एवं अन्य महत्वपूर्ण विषयों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भुगतान व्यवस्था में ठोस सुधार लाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी भुगतान रेगुलर बेसिस पर, सुचारु एवं पारदर्शी तरीके से हों। इसके लिए डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए, जिससे भुगतान प्रक्रिया को सरल, तेज और प्रभावी बनाया जा सके।
किसी सेवा प्रदाता का टेंडर समाप्त होने से पूर्व ही नए सेवा प्रदाता के चयन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए, ताकि सेवाओं में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में समन्वय, समयबद्धता, जवाबदेही और परिणामपरक कार्यप्रणाली को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में पब्लिक ब्लॉक हेल्थ यूनिट के क्रियाशील न होने के मामले की भी समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए तथा यूनिट को प्रभावी ढंग से क्रियाशील कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी.












