बंबई उच्च न्यायालय ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बृहस्पतिवार को समाचार पत्रिका ‘तहलका’ के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए निचली अदालत द्वारा उसे बरी किए जाने के फैसले को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय की गोवा पीठ की न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल की सजा सुनायी है।
अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (भादसं) की धारा 376(2)(एफ) (संरक्षक या विश्वास अथवा अधिकार की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति द्वारा महिला से दुष्कर्म), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दोषी ठहराया। धारा 376 के तहत तेजपाल को 10 वर्ष की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने न्यूनतम सजा देने का अनुरोध किया, जबकि गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा की मांग की।
अदालत में मौजूद तेजपाल ने स्वयं को ”राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार” बताते हुए नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि वह दो बेटियों के पिता हैं। इसके बाद संवाददाताओं से बातचीत में तेजपाल ने कहा कि वह बंबई उच्च न्यायालय के दोषसिद्धि आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती देगा। यह मामला नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में अपनी एक पूर्व कनिष्ठ महिला सहकर्मी के कथित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म से जुड़ा है। निचली अदालत ने 2021 में तेजपाल को इस मामले में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।







