बिहार में 8 सीटों पर एमएलसी चुनाव संपन्नः शिक्षक सीटों पर 74.55 प्रतिशत वोटिंग, स्नातक सीटों में 43.87 प्रतिशत वोटिंग, अब 27 अक्टूबर को आएगा चुनाव परिणाम 

On: October 24, 2026 10:43 AM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार विधान परिषद यानी एमएलसी की शिक्षक व स्नातक कोटे की 8 सीटों के लिए शुक्रवार यानी 23 अक्टूबर को मतदान संपन्न हो गया। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर वोटरों ने ज्यादा उत्साह दिखाया। जबकि, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर मतदान का प्रतिशत काफी कम रहा। शिक्षक सीटों पर औसतन 74.55 प्रतिशत और स्नातक सीटों पर 43.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अब सभी की निगाहें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। इन चुनावों से राज्य सरकार की संरचना पर सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन, परिणाम राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। कम मतदान ने खासकर स्नातक कोटे की सीटों पर प्रत्याशियों की चिंता बढ़ा दी है।

शिक्षक कोटे की 4 सीटों पर कुल 40,253 वोटर थे। इनमें औसतन 74.55 प्रतिशत मतदान हुआ। सारण सीट पर सबसे ज्यादा 87.16 प्रतिशत वोट पड़े हैं। वहीं, दरभंगा में 79 प्रतिशत, तिरहुत में 78.19 प्रतिशत और पटना में 56.89 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। इन 4 सीटों पर कुल 60 प्रत्याशी चुनावी मैदान में डटे हैं। जिनके भाग्य का फैसला मतदान के दिन वोटरों ने वोटिंग कर मत-पेटी में डाल दिया है। अधिक मतदान से प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के बीच जीत-हार को लेकर गुणा-गणित तेज हो गया है।

स्नातक कोटे की 4 सीटों पर मतदान का औसत 43.87 प्रतिशत रहा है। कुल 4,92,594 वोटरों वाली इन सीटों पर 90 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जिनके भाग्य का फैसला मतदान के दिन वोटरों ने मत-पेटी में डाल दिया है। कोसी सीट पर सबसे ज्यादा 52.51 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं, तिरहुत में 42.15 प्रतिशत, दरभंगा में 42 प्रतिशत और पटना में सबसे कम 36.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पटना स्नातक सीट इस बार राजनीतिक कारणों से भी चर्चा में रही है। वोटिंग खत्म होने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों की नजरें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर हैं। उसी दिन स्पष्ट होगा कि किस निर्वाचन क्षेत्र में किस प्रत्याशी को जीत मिली है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय के मुताबिक, मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहा। स्नातक कोटे की सीटों के लिए 598 और शिक्षक कोटे की सीटों के लिए 335 मतदान केंद्र बनाए गए थे। नियंत्रण कक्ष को कुल 13 शिकायतें मिलीं, जिनका निष्पादन कर दिया गया है। हालांकि, मतदान के दौरान राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। सारण शिक्षक सीट से जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी आफाक अहमद के विरुद्ध आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि इंटरनेट मीडिया पर शिक्षकों को 7वां वेतनमान दिलाने का उल्लेख करते हुए उन्हें भारी मतों से जिताने की अपील की गई थ़ी।

वोटिंग शुरू होने के साथ ही मोकामा में जद(यू.) विधायक अनंत कुमार सिंह और मौजूदा एमएलसी व जद(यू.) प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थकों के बीच झड़प की घटना सामने आई। इस मामले में जद(यू.) विधायक अनंत सिंह के निजी सुरक्षा गार्ड विपिन सिंह, समर्थक राजेश सिंह और नगर भाजपा अध्यक्ष राहुल रंजन को हिरासत में लिया गया। पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की लगातार चौथी जीत की कोशिश और उनके विरोध में सक्रिए राजनीतिक गुटों के कारण मुकाबला खासा चर्चित रहा। जद(यू.) विधायक अनंत सिंह जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ.अनुज सिंह के समर्थन में सक्रिय रहे हैं।

एमएलसी चुनाव में 8 सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के कुल 14 प्रत्याशी मैदान में रहे। 5 सीटों पर राजद और कांग्रेस के बीच दोस्ताना मुकाबले की स्थिति बनी। इससे महागठबंधन के अंदर वोटों के बंटवारे की आशंका भी रही। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन सीट पर कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी डा.मदन मोहन झा के सामने राजद के कुमर राय मैदान में डटे हैं। यहां भाकपा-माले ने भी अपना प्रत्याशी उतारा। कुल मिलाकर राजद के 7, कांग्रेस के 5 और भाकपा व भाकपा-माले के 1-1 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। एनडीए में एकजुटता बनी रही है। एनडीए समर्थित जद(यू.) के 4 और भाजपा के 4 प्रत्याशी मैदान में हैं। इन 8 सीटों पर कुल 150 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला अब मतगणना के बाद ही सामने होगा। शिक्षक कोटे की सीटों पर ज्यादा वोटिंग और स्नातक सीटों पर कम वोटिंग के राजनीतिक मायने क्या होंगे, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा। एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज पार्टी के लिए ये नतीजे आगे की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।

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