नेशनल नितिन : पंजाब में नशा तस्करों और बड़े ड्रग सिंडिकेट्स पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने पुलिस तंत्र को कानूनी तौर पर बेहद ताकतवर बना दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पंजाब सरकार पर नशा तस्करों के प्रति नरम रुख अपनाने और PIT-NDPS (प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस) एक्ट का उपयोग न करने को लेकर की गई तीखी आलोचना के ठीक अगले दिन राज्य के गृह विभाग ने 21 अक्टूबर को एक अहम अधिसूचना जारी कर दी है। इस नए आदेश के तहत अब नशा तस्करों की प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक नजरबंदी) के अधिकार सीधे पुलिस कमिश्नर (CP), महानिरीक्षक (IG) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) व उससे उच्च रैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं।
गृह सचिव की अनुमति का झंझट खत्म, फील्ड स्तर पर तुरंत कटेगा वारंट
अब तक के नियमों के तहत PIT-NDPS एक्ट के तहत किसी भी बड़े ड्रग स्मग्लर को एहतियातन नजरबंद करने का अधिकार केवल पंजाब के गृह सचिव के पास सीमित था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फील्ड से प्रस्ताव भेजने के बाद फाइलों को मंजूरी मिलने में अक्सर कई-कई महीने लग जाते थे, जिससे नशा तस्कर या तो भूमिगत हो जाते थे या जमानत पर छूटकर दोबारा नेटवर्क चलाने लगते थे। एक वरिष्ठ एडीजीपी रैंक के अधिकारी ने पुष्टि की कि नई अधिसूचना के बाद अब जिला और कमिश्नरेट स्तर पर आईजी या उच्च अधिकारी की सहमति से सीधे नजरबंदी के आदेश पारित किए जा सकेंगे, जिससे कार्रवाई में लगने वाला लंबा प्रशासनिक समय बचेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री के बयानों के बाद गरमाई थी सियासत :-
उल्लेखनीय है कि अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा था कि पूरे देश में PIT-NDPS एक्ट के तहत 929 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि पंजाब ने इस सख्त कानून का इस्तेमाल नहीं किया और एक भी मामला दर्ज नहीं किया। हालांकि, राज्य सरकार के सूत्रों का दावा है कि पिछले महीने तक पंजाब में इस कानून के तहत 7 मामलों में निवारक नजरबंदी के आदेश जारी किए जा चुके थे। अब शक्तियों के विकेंद्रीकरण से जिलों में तैनात वरिष्ठ अधिकारी अपने विवेक का इस्तेमाल कर नशा तस्करों को तय समय सीमा के लिए सीधे जेल/नजरबंदी में भेज सकेंगे।
संपत्तियां सीज और जब्त करने का रास्ता साफ, 20-पॉइंट चेकलिस्ट को सरल बनाने की मांग :-
PIT-NDPS कानून केवल नजरबंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत आदेश जारी होते ही नशा तस्करी से अर्जित की गई अवैध संपत्तियों, जमीनों, मकानों और बैंक खातों को तुरंत जब्त (Seize), फ्रीज (Freeze) और कुर्क (Forfeit) किया जा सकता है। यह शिकंजा तस्कर के अलावा उसके रिश्तेदारों और सहयोगियों की बेनामी संपत्तियों पर भी समान रूप से लागू होता है। वहीं, पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि प्रिवेंटिव डिटेंशन का प्रस्ताव तैयार करने के लिए 20 बिंदुओं वाली एक लंबी और बेहद जटिल चेकलिस्ट को पूरा करना पड़ता है, जो फील्ड अफसरों के लिए काफी कठिन प्रक्रिया है। अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सरकार को न्यूनतम औपचारिकताओं वाली एक नई सरल एसओपी (SOP) जारी करनी चाहिए ताकि तस्करों को तत्काल सलाखों के पीछे भेजा जा सके।






