बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। नमो सरकार के केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री व लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि स्थायी सहायक प्राध्यापकों की बहाली प्रक्रिया शुरू करने से पूर्व वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे गेस्ट प्रोफेसर्स के हितों का ध्यान रखा जाए और उनका सेवा-समायोजन किया जाए।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने पत्र में लिखा कि ’सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली-2026’ को लागू करने से पूर्व सभी हितधारकों से सुझाव लेना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि छात्र-छात्राओं, अभ्यर्थियों, अतिथि प्राध्यापकों, विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षाविदों के साथ विस्तृत चर्चा की जाए। इसके साथ ही, उन्होंने यूजीसी के दिशा-निर्देशों के आधार पर नियमावली की समीक्षा की वकालत की। ताकि, राज्य में पठन-पाठन और अनुसंधान की गुणवत्ता पर कोई विपरीत असर न पड़े।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने ध्यान दिलाया कि लम्बे समय से अपनी सेवाएं दे रहे योग्य अतिथि शिक्षकों का भविष्य अधर में नहीं लटकना चाहिए। राज्य में बने नए कॉलेजों में इन अनुभवी शिक्षकों का सदुपयोग किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन शिक्षकों को स्थाई अवसर या समायोजन का विकल्प देकर उनके अनुभव का बेहतर इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर न्यायसंगत और दूरगामी फैसला लेगी। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि नई नियमावली ऐसी होनी चाहिए जो योग्य उम्मीदवारों को अवसर दे, युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करे और बिहार की उच्च शिक्षा प्रणाली को और मजबूत तथा प्रासंगिक बनाए। उन्होंने इन 6 बिंदुओं पर पुनर्विचार की अपील है। इसमें सहायक प्राध्यापक बहाली में यूजीसी रेगुलेशन-2018, टेबल 3ए को लागू किया जाए, सहायक प्राध्यापक हेतु अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष किया जाए, बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक बहाली को स्थायी और नियमित किया जाए, सहायक प्राध्यापक बहाली में डोमिसाइल नीति को लागू किया जाए, बिहार के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के स्वायत्तता का हनन बंद किया जाए और नियमित सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से पूर्व बिहार के विश्वविद्यालयों में लगातार कई वर्षों से कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को बिहार सरकार द्वारा सेवा सामंजन (65 वर्ष) किया जाए शामिल है।











