पंजाब लुधियाना (नितिन ) : पंजाब पुलिस के बहुचर्चित और खाकी को शर्मसार करने वाले करीब 6 साल पुराने मामले में सेशन अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने खन्ना के सदर थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर बलजिंदर सिंह को एक अमृतधारी सिख व्यक्ति, उनके बेटे और एक साथी को थाने के भीतर जबरन निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटने और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के गंभीर मामले में दोषी करार देते हुए 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है।
यह सनसनीखेज मामला जून 2019 का है। आरोप के मुताबिक, खन्ना के सदर थाने में तत्कालीन एसएचओ बलजिंदर सिंह ने अपने कार्यालय में एक अमृतधारी व्यक्ति, उनके बेटे और एक अन्य साथी को अवैध हिरासत में रखा। आरोपियों ने पीडि़तों को जबरन निर्वस्त्र किया, उनके ककार व धार्मिक मान-मर्यादा का अपमान किया और बेरहमी से लात-घूंसों व डंडों से पीटा। इतना ही नहीं, इस पूरी अमानवीय प्रताडऩा की बाकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग की गई, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। वीडियो सामने आने के बाद पूरे पंजाब में भारी जनाक्रोश फैल गया था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। घटना के बाद पीडि़तों को न्याय पाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने के चलते पीडि़त पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एडीजीपी डॉ. नरेश अरोड़ा की अध्यक्षता में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया था। एसआईटी द्वारा जांच पूरी किए जाने के बाद वर्ष 2020 में खन्ना के सिटी थाना-1 में तत्कालीन इंस्पेक्टर बलजिंदर सिंह और हवलदार वरुण कुमार के खिलाफ विभिन्न संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता पक्ष के वरिष्ठ वकील गुरविंदर सिंह बराड़ ने लुधियाना सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई 3 साल की सजा की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पीडि़त परिवार इस सजा से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। वकील गुरविंदर सिंह बराड़ ने बताया कि पीडि़त पक्ष जल्द ही पंजाब के डीजीपी से मुलाकात करेगा और दोषी इंस्पेक्टर बलजिंदर सिंह को तुरंत प्रभाव से पुलिस सेवा से बर्खास्त करने की मांग रखेगा। इसके अलावा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के मद्देनजर सजा की अवधि को बढ़वाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जल्द ही पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी।
वकीन ने बताया कि फिलहाल सेशन कोर्ट के फैसले की विस्तृत लिखित प्रति आना बाकी है। विस्तृत आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि 3 साल की जेल के अलावा दोषी पर कितना जुर्माना लगाया गया है तथा मामले में सह-आरोपी रहे हवलदार वरुण कुमार की भूमिका को लेकर अदालत ने क्या फैसला सुनाया है।






