बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार के नालंदा में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की मौत का मामला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। जिस घटना को शराब तस्करों की गोलीबारी बताया गया था, प्रारंभिक जांच में उसकी कहानी झूठी निकली। यही नहीं, मामला अब आपसी संबंधों की ओर मुड़ता हुआ भी दिख रहा है। नालंदा के पुलिस अधीक्षक हृदय कांत ने शुक्रवार यानी 16 अक्टूबर को बिहारशरीफ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी। पुलिस जांच के मुताबिक, शराब तस्करों का पीछा करने के दौरान साथी होमगार्ड जवान रिशु कुमार की राइफल से चली गोली सिपाही अजीत कुमार के सिर में लगी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। आरोप है कि घटना के बाद तस्करों की गोलीबारी में सिपाही के जख्मी होने की मनगढ़ंत कहानी बनाकर अधिकारियों को गुमराह करने और साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई। इस मामले में उत्पाद महिला दरोगा पुष्पा कुमारी, होमगार्ड जवान रिशु कुमार, दीनानाथ, सन्नी कुमार, पटना से आई गाड़ी में सवार सिपाही अनूप कुमार, पटना खाजेकला थाना क्षेत्र के गौरव उर्फ निशांत एवं रामकृष्णा नगर के शंकर कुमार सहित कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
मामले में यह बात सामने आई है कि महिला दारोगा और मृतक सिपाही के बीच दोस्ती थी। साथ ही, जिस होमगार्ड जवान की राइफल से गोली चली, उसकी भी महिला दारोगा से दोस्ती थी। चर्चा है कि क्या यह आपसी संबंधों के चलते की गई सुनियोजित हत्या है? हालांकि, इन चर्चाओं पर पुलिस अधीक्षक हृदय कांत ने कहा कि फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक हृदय कांत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 14 अक्टूबर की रात करीब 10.30 बजे उत्पाद विभाग की टीम शराब लदी पिकअप वैन का पीछा कर रही थी। टीम में स्थानीय जिला पुलिस शामिल नहीं थी। गाड़ियों की दौड़ के दौरान सबसे आगे तस्करों की पिकअप वैन, उसके पीछे सिपाही अजीत कुमार के सवार होने की बात बताई गई काली स्कॉर्पियो और सबसे पीछे महिला दरोगा पुष्पा कुमारी की गाड़ी चल रही थी। इसी दौरान भागती गाड़ी को रोकने के लिए एक होमगार्ड जवान ने अपनी राइफल से गोली चलाई। गोली तस्करों की गाड़ी में लगने के बजाए आगे चल रही दूसरी गाड़ी में जा लगी। इससे सिपाही अजीत कुमार गंभीर रूप से जख्मी हो गए।

गोली लगने के बाद सिपाही अजीत कुमार को पहले पावापुरी स्थित भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान यानी विम्स में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर हालत में उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना स्थित पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। आरोप है कि टीम ने तत्काल स्थानीय थाना और वरीय अधिकारियों को घटना की सूचना नहीं दी। जिले की सीमा से बाहर निकलने के बाद तस्करों की गोलीबारी में सिपाही के घायल होने की जानकारी दी गई। सुबह तक इसी कहानी के आधार पर अधिकारियों को घटना की जानकारी दी जाती रही। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि घटना के वास्तविक कारण को छिपाने की कोशिश क्यों की गई और अधिकारियों को गुमराह करने में किसकी क्या भूमिका थी। राजगीर पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने टीम के सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ की। इस दौरान उनके बयानों में विरोधाभास सामने आया। जांच में यह बात भी सामने आई कि गोली लगी गाड़ी को नालंदा पुलिस को सौंपने के बजाए पटना ले जाया गया था। पुलिस ने पटना से गाड़ी बरामद की, जिसमें गोली लगने के निशान मिले हैं। इसके अलावा होमगार्ड जवान की सरकारी राइफल भी जब्त कर ली गई है। पुलिस बरामद साक्ष्यों और आरोपितों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
नालंदा के उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी का कहना है कि छापेमारी से पूर्व स्थानीय थाना और वरीय अधिकारियों को सूचना नहीं दी गई थी। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि सक्षम पदाधिकारी के बिना कार्रवाई क्यों की गई, फायरिंग का निर्देश किन परिस्थितियों में दिया गया और घटना के बाद सच्चाई छिपाने की कोशिश क्यों हुई। शराब लदी पिकअप वैन और शराब तस्करी के नेटवर्क का पता लगाने के लिए भी जांच जारी है।

उधर, सिपाही अजीत कुमार का शव गुरुवार को उनके पैतृक गांव नगरनौसा थाना क्षेत्र के नगमा गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। परिजनों की चीत्कार से पूरा गांव गमगीन हो गय। इस दौरान ’सिपाही अजीत अमर रहें’ और ’भारत माता की जय’ के नारों से गांव गूंज उठा। लोगों ने नम आंखों से वीर सिपाही को श्रद्धांजलि दी और शराब तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि, नालंदा जिले के नगमा गांव निवासी मदन प्रसाद के 30 वर्षीय पुत्र अजीत कुमार बिहार उत्पाद विभाग में सिपाही के पद पर कार्यरत थे। बुधवार की देर रात शराब तस्करों को पकड़ने के दौरान चली गोलीबारी में सिपाही अजीत कुमार के सिर में गोली लग गई। गंभीर हालत में उन्हें बेहतर उपचार के लिए पटना ले जाया जा रहा था। लेकिन, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई थी। मृतक सिपाही अजीत कुमार की 5 वर्ष की एक पुत्री पीहू अभी इतनी छोटी है कि उसे पिता को हमेशा के लिए खो देने का एहसास शायद पूरी तरह नहीं है। परिवार के लिए यह दुख और भी बड़ा है। क्योंकि, अजीत कुमार घर की जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। तीन भाइयों में वह मंझले थे। उनके पिता मदन कुमार झारखंड पुलिस में दरोगा थे और वर्ष 2025 में सेवानिवृत्त हुए थे। अजीत कुमार के बड़े भाई खेती करते हैं। जबकि, छोटे भाई की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी अजीत कुमार के कंधों पर थी। उन्होंने वर्ष 2023 में मद्य निषेध विभाग में सिपाही के पद पर योगदान दिया था। पटना में तैनात रहते अजीत कुमार ने 6 वर्ष पूर्व संगीता कुमारी से प्रेम विवाह किया था। उनकी मौत से परिवार के सामने भावनात्मक दुख के साथ भविष्य की चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। अजीत कुमार की पत्नी संगीता कुमारी से घटना की रात आखिरी बार बात भी हुई थी। सिपाही अजीत कुमार ने कहा था कि ’’मैं बड़ी कार्रवाई के लिए टीम के साथ निकल रहा हूं, सुबह फुर्सत मिलते ही दोबारा कॉल करूंगा। तुम सब अपना ख्याल रखना और पीहू को सुला देना।’’ पत्नी संगीता कुमारी से वीडियो कॉल पर कही गईं ये बातें सिपाही अजीत कुमार की आखिरी बातचीत बन गईं। शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निकले अजीत कुमार की गोली लगने से मौत हो गई। पीछे पत्नी और 5 वर्ष की पुत्री पीहू रह गई हैं।












