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Sarvapitri Amavasya Katha: भूल गए हैं पूर्वजों की मृत्यु तिथि? सर्वपितृ अमावस्या पर इस कथा के पाठ से मिलेगा सभी पितरों का आशीर्वाद

On: October 10, 2026 9:32 AM
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Sarvapitri Amavasya fast story: पितृ पक्ष का अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान किसी कारणवश छूट गया हो। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को उनका अखंड आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति पूरे साल भर में श्राद्ध-तर्पण नहीं करता, अगर वह भी इस तिथि पर श्राद्ध-तर्पण कर लेता है तो उसे सभी तिथियों के श्राद्ध कर्म के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। आप भी भूल गए हैं पूर्वजों की मृत्यु तिथि तो पढ़ें ये सर्वपितृ अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा। अगर पितरों के निमित्त व्रत रख रहे हैं तो भी इस कथा को पढ़ने अथवा सुनने से सुख-समृद्धि बनी रहती है और पितृ दोष के प्रभावों से राहत मिलती है।

पौराणिक समय में अग्निष्वात और बर्हिषपद नाम के दो पितृ देव थे। उनकी मानस कन्या थीं अक्षोदा। अक्षोदा ने पितरों को प्रसन्न करने के लिए एक हजार वर्ष तक बिना किसी विघ्न के तपस्या की। उसके तप से प्रसन्न होकर समस्त पितरगण अक्षोदा के समक्ष प्रकट हुए। उन पितरों में एक तेजस्वी पितृ अमावसु भी थे जिन्हें अक्षोदा बिना पलक झपकाए देखती रही, वो उनमें इस तरह मग्न हो गई कि उसने अपने पितरों की बातों को अनसुना कर दिया।

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