चंडीगढ़ (नितिन): पंजाब पुलिस और कई जिला पुलिस यूनिट्स के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर घायल और अपमानजनक हालत में गिरफ्तार आरोपियों के वीडियो के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) फाइल की गई है। चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने पंजाब DGP गौरव यादव से जवाब मांगा है और सुनवाई 26 नवंबर तक टाल दी है।
हाईकोर्ट के वकील निखिल थम्मन की फाइल की गई पिटीशन में लुधियाना रूरल, SAS नगर, पटियाला, मोगा, फाजिल्का, जालंधर, फरीदकोट और फिरोजपुर पुलिस के सोशल मीडिया अकाउंट का जिक्र किया गया है। पिटीशन में कहा गया है कि वीडियो में गिरफ्तार लोगों को शारीरिक चोटों और चलने में दिक्कत जैसी हालत में दिखाया गया है। ऐसे वीडियो पुलिस कस्टडी में बुरे बर्ताव और गैर-कानूनी सजा को नॉर्मल बनाने के अलावा, जनता में डर पैदा करते हैं और क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में भरोसा कम करते हैं।
पिटीशनर ने आपत्तिजनक वीडियो की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए जांच की मांग की है, साथ ही आरोपियों पर कथित शारीरिक हिंसा के वीडियो रिकॉर्ड करने, एडिट करने और पब्लिश करने के लिए जिम्मेदार लोगों की भी जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और गिरफ्तार आरोपियों की पब्लिक में बेइज्जती या पुलिस के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर गैर-कानूनी पुलिसिंग की तारीफ रोकने के लिए राज्य लेवल पर निर्देश जारी करने की भी मांग की है।







