राष्ट्रीय ( नितिन ) : देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत की दो सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियां, रिलायंस जियो (Reliance Jio) और एयरटेल (Airtel) एक बार फिर अपने ग्राहकों को झटका देने की तैयारी में हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले 3 से 4 महीनों में मोबाइल रिचार्ज की कीमतों में 12 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
सस्ते प्रीपेड प्लान्स पहले ही हुए बंद
आपको बता दें कि हाल ही में एयरटेल ने अपने कुछ सबसे सस्ते प्रीपेड रिचार्ज प्लान्स को बंद कर दिया है, जिसके कारण ग्राहकों को मजबूरी में महंगे प्लान्स चुनने पड़ रहे हैं। ऐसे में अगले कुछ महीनों में होने वाली यह संभावित बढ़ोतरी प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के यूजर्स की जेब पर भारी पड़ने वाली है। विशेष रूप से वे यूजर्स जो हर महीने या तीन महीने का रिचार्ज कराते हैं, उनका बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है।
कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें? (अनुमानित गणित) अगर यह बढ़ोतरी लागू होती है, तो मौजूदा रिचार्ज प्लान्स की कीमतें इस तरह बढ़ सकती हैं तो 500 रुपये वाले प्लान के लिए 12% की बढ़ोतरी होने पर ग्राहकों को 560 रुपये चुकाने होंगे। यदि यह बढ़ोतरी 15% तक होती है, तो इसी प्लान के लिए 575 रुपये देने पड़ सकते हैं।
(नोट: अभी दोनों कंपनियों की ओर से कीमत बढ़ाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, यह केवल एक मार्केट फोरकास्ट है।)
मुनाफा कमाने के बावजूद आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
टेलीकॉम कंपनियों द्वारा इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे कई मुख्य कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें नेटवर्क विस्तार, 5G इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, स्पेक्ट्रम की भारी लागत और प्रति ग्राहक औसत कमाई (ARPU) को बढ़ाना शामिल है।
हालांकि, इस बढ़ोतरी की चर्चा ने एक नए विवाद को भी जन्म दे दिया है। दरअसल, पिछले साल जियो और एयरटेल दोनों ने 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) दर्ज किया था। ऐसे में ग्राहकों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि इतना बड़ा मुनाफा कमाने के बाद भी कंपनियों को रिचार्ज की कीमतें बढ़ाने की क्या जरूरत है?
बाजार में बढ़ता ‘डुओपॉली’ (Duopoly) का खतरा
भारत के टेलीकॉम बाजार में जियो और एयरटेल का दबदबा लगातार मजबूत होता जा रहा है। हालांकि वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) और सरकारी कंपनी बीएसएनएल (BSNL) भी बाजार में मौजूद हैं, लेकिन प्राइवेट मोबाइल मार्केट के बड़े हिस्से पर केवल जियो और एयरटेल का ही नियंत्रण है। इस स्थिति को ‘डुओपॉली’ कहा जाता है,जहां किसी सेक्टर में मुख्य रूप से दो ही कंपनियों का वर्चस्व होता है। ऐसे बाजार में यदि दोनों दिग्गज कंपनियां अपने टैरिफ बढ़ा देती हैं, तो उपभोक्ताओं के पास महंगी सर्विस लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह जाता है।








