देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर सुचारू रूप से दौड़ रही है। हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन में रोजाना 80 से 90 हजार रुपये की गैस खर्च हो रही है जबकि टिकटों से होने वाली आय लगभग सात हजार रुपये ही है। यानी ट्रेन की कमाई के मुकाबले संचालन खर्च करीब 12 गुना अधिक है।

रेलवे के अनुसार हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन में प्रति किलोमीटर लगभग 500 रुपये का खर्च आ रहा है। जींद से सोनीपत के बीच ट्रेन की दूरी 160 किलोमीटर है। केवल हाइड्रोजन गैस पर ही प्रतिदिन लगभग 80 से 90 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा ट्रेन के रखरखाव, तकनीकी निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य परिचालन खर्च भी अलग से शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद से ट्रेन का नियमित संचालन किया जा रहा है। रेलवे की तकनीकी टीमें ट्रेन की गति, ईंधन खपत, सुरक्षा प्रणाली और परिचालन क्षमता की लगातार निगरानी कर रही हैं। ट्रेन प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद स्टेशन से सोनीपत के लिए रवाना होती है। ट्रेन में अब तक 307 यात्री सफर कर चुके हैं

सोनीपत की तरफ से ज्यादा कम यात्री कर रहे हैं सफर
हाइड्रोजन ट्रेन में जींद की तरफ से सोनीपत जाने वाले यात्रियों की आंकड़ा 50 के पार नहीं हुआ है। हालांकि सोनीपत से जींद की तरफ आने वाले यात्रियों की संख्या 100 के पार हो जाती है। वहीं 100 से 120 के करीब यात्री जींद से सोनीपत के बीच आने वाले स्टेशनों पर उतरते-चढ़ते हैं। वाणिज्यिक अधीक्षक धीरज बुटानी का कहना है कि धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी।










