लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (BBAU), लखनऊ के 30 से अधिक दलित छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न एवं शैक्षणिक दमन के गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें निष्कासन, आर्थिक दंड, परीक्षा से वंचित किए जाने तथा भविष्य की शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्रों के अनुसार, शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से छात्रहित के मुद्दे उठाने के बावजूद कुछ छात्रों के विरुद्ध डकैती, लूट, चोरी एवं तोड़फोड़ जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। छात्र इन आरोपों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं और उनका कहना है कि किसी भी छात्र को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
छात्रों का दावा है कि 30 से अधिक छात्रों के विरुद्ध विभिन्न अनुशासनात्मक कार्रवाइयां की गई हैं, जिनमें निष्कासन, आर्थिक दंड, परीक्षा संबंधी प्रतिबंध तथा भविष्य की शिक्षा प्रभावित करने वाले निर्णय शामिल हैं। छात्रों के अनुसार, कुछ मामलों में ₹12,000 तक का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
छात्रों का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने के दौरान उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

छात्रों की प्रमुख मांगें :–
- विश्वविद्यालय प्रशासन सभी छात्रों के साथ समान एवं निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करे तथा छात्रों के विरुद्ध की गई मनमानी एवं भेदभावपूर्ण कार्रवाइयों को तत्काल समाप्त किया जाए।
- 30 से अधिक छात्रों के विरुद्ध की गई निष्कासन सहित सभी अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाइयों को तत्काल रद्द किया जाए।
- छात्रों के विरुद्ध दर्ज गंभीर मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए तथा छात्रों पर लगाए गए आरोपों एवं मुकदमों के संबंध में निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- छात्रों पर लगाए गए आर्थिक दंड को तत्काल रद्द किया जाए तथा वसूली गई राशि वापस की जाए।
- जिन छात्रों को परीक्षाओं से वंचित किया गया है, उनके विरुद्ध परीक्षा संबंधी प्रतिबंध एवं अन्य कार्रवाई तत्काल रद्द कर उन्हें परीक्षा/री-एग्जाम में शामिल होने का अवसर दिया जाए।
- छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित करने वाले सभी निष्कासन, निलंबन, प्रतिबंध एवं अन्य दंडात्मक आदेश तत्काल रद्द किए जाएं।
- छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन एवं स्वच्छ पेयजल सहित सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
- जातिगत भेदभाव, जातिसूचक शब्दों एवं अपमानजनक व्यवहार की शिकायतों पर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।












