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राष्ट्रीय , धार्मिक, साहित्यिक एवं कला महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश पर्यटन, उत्तर प्रदेश शासन तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, उत्तर प्रदेश के सहयोग से होटल रीजेंटा सेंट्रल में “राष्ट्रीय साहित्यिक, धार्मिक, नैतिक एवं कला महोत्सव 2026” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रख्यात धर्मगुरुओं, साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, रचनाकारों, उपन्यासकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री, सांसद एवं उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री बैजनाथ रावत जी रहे। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्रीमती मंजुला पंत जी रहीं। इसके अतिरिक्त डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव एवं श्रीमती गीता जी, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन महिला मोर्चा, सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

काव्य एवं साहित्यिक सत्र : कार्यक्रम के प्रथम सत्र “काव्य एवं साहित्य परिचय” में भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं कला की विविध परंपराओं की प्रस्तुति की गई। वरिष्ठ कथक गुरु डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव एवं उनके शिष्यों द्वारा विशेष प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात लखनऊ की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना अर्चना गुप्ता द्वारा मनोहारी कथक प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम के दौरान “काव्य संध्या” एवं “काव्य सुधाकर” जैसे साहित्यिक आयोजन भी किए गए, जिनमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों एवं रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, संस्कृति, सामाजिक सरोकार एवं मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त किया।

ट्रांसजेंडर साहित्यकारों का राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन – महोत्सव की विशेष उपलब्धि के रूप में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं साहित्य अकादमी के सहयोग से ट्रांसजेंडर साहित्यकारों का राष्ट्रीय स्तर का साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में ट्रांसजेंडर समुदाय की साहित्यिक अभिव्यक्ति, सामाजिक सरोकार, पहचान, अधिकार एवं भारतीय साहित्य में उनकी भूमिका पर सार्थक विमर्श हुआ।

इस महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता श्री शिवेंन गुरेजा ने की। कार्यक्रम में सौम्या अली, मिश्रा सोनू जायसवाल, श्री विवान अंसारी, श्री शिवांश सिंह, रितेश सिंह, मित्ती, नितिन एवं गजेंद्र गुप्ता सहित अनेक साहित्यकार एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने मॉडरेटर के रूप में किया।

देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज के उन वर्गों की आवाज़ को भी मंच प्रदान करता है, जिन्हें लंबे समय तक मुख्यधारा से अलग रखा गया। ट्रांसजेंडर साहित्यकारों को राष्ट्रीय साहित्यिक मंच उपलब्ध कराना भारतीय साहित्य की विविधता और समावेशिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों की सहभागिता – महोत्सव में डॉ. सुधा मिश्रा, श्री संदीप पांडे, श्रीमती दिव्या शुक्ला, डॉ. शालिनी अग्रवाल, डॉ. जया, श्रीमती गीता गुप्ता, श्रीमती अफसाना तथा वरिष्ठ पत्रकार देव त्रिपाठी सहित साहित्य, सामाजिक सेवा, पत्रकारिता एवं संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य, साहित्य, सामाजिक समावेशन तथा सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि कला और साहित्य समाज में संवाद, समानता, सम्मान एवं सामाजिक समरसता स्थापित करने के प्रभावी माध्यम हैं।

देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों का उद्देश्य केवल साहित्य और कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद एवं समानता की भावना को मजबूत करना भी है। उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय के साहित्यकारों, कलाकारों एवं रचनाकारों को मुख्यधारा के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक मंचों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कलाकारों, प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थाओं एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया तथा सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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