बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में राजधानी पटना की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में आज वोटों की गिनती जारी है। 26वें राउंड की गिनती के बाद देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार रह चुके जन सुराज पार्टी यानी जेएसपी के सूत्रधार व प्रत्याशी प्रशांत किशोर यानी पीके आगे चल रहे हैं। प्रशांत किशोर पहले राउंड से ही लगातार बढ़त नाए हुए हैं। प्रशांत किशोर ने पहले राउंड में 862 वोटों से बढ़त बनाई, जो 26वें राउंड की गिनती के बाद 15,864 वोटों से आगे रहे हैं। उन्हें अब तक 53,566 वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 37,702 वोट मिले हैं। तीसरे नंबर पर चल रहीं राजद की रेखा गुप्ता को 11,933 वोट मिले हैं। जेएसपी के पटना ऑफिस पर अब जश्न का माहौल है। प्रशांत किशोर के समर्थक व कार्यकर्ता दोनों ऊपर हाथ उठाकर ठुमके लगा रहे हैं।
वर्ष 2008 के परिसीमन से पूर्व यह सीट पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी। आजादी के बाद यहां पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1957 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के रामशरण साव पहले विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1962 में कांग्रेस के कृष्ण बल्लभ सहाय ने जीत दर्ज की। 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा ने चुनाव जीता। उनके इस्तीफे के बाद 1969 में हुए उपचुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी भाकपा के ए.के. सेन विजयी हुए। 1972 में भाकपा के ही सुनील मुखर्जी ने इस सीट पर कब्जा जमाया। 1977 की जनता लहर में जनता पार्टी के ठाकुर प्रसाद ने जीत हासिल की। जबकि, 1980 में कांग्रेस के रणजीत सिन्हा ने पार्टी की वापसी कराई। बांकीपुर के राजनीतिक इतिहास में 1985 का चुनाव सबसे अलग माना जाता है। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रामानंद यादव ने सभी प्रमुख दलों को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की थी। यह परिणाम इस बात का उदाहरण बना कि पटना पश्चिम की सीट पर मतदाता कभी भी अचानक राजनीतिक बदलाव का फैसला दे सकते हैं।

वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव के बाद इस सीट की राजनीति पूरी तरह बदल गई। भाजपा के नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने जीत दर्ज की और इसके बाद वर्ष 2000, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 के चुनाव में भी लगातार विजयी रहे। इस दौर में पटना पश्चिम भाजपा के मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित हुआ। वर्ष 2006 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र नितिन नवीन पहली बार विधायक बने। वर्ष 2008 में नये परिसीमन के बाद पटना पश्चिम सीट का नाम बदलकर बांकीपुर कर दिया गया। लेकिन, भाजपा का दबदबा कायम रहा। बांकीपुर सीट बनने के बाद वर्ष 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद नितिन नवीन लगातार जीतते रहे। 2010 में उनकी जीत का अंतर 60,840 वोट रहा था। 2015 में उन्होंने 39,767 वोटों से जीत दर्ज की। जबकि, 2020 में जीत का अंतर 39,036 वोट रहा। 2025 के चुनाव में भी उन्होंने 98,299 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की। तीन दशक से अधिक समय से भाजपा का कब्जा रहने के कारण बांकीपुर को भाजपा का सुरक्षित गढ़ माना जाता है। हालांकि, इस बार प्रशांत किशोर की सक्रियता ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
बांकीपुर सीट कई चर्चित चेहरों की हार की भी गवाह रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में देश-दुनिया में ’बिहारी बाबू’ के नाम से मशहूर फिल्म अभिनेता और त्रिमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़े और भाजपा के नितिन नवीन से मात खा गए थे। इसी चुनाव में पुष्पम प्रिया चौधरी भी चुनावी मैदान में थीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय भी इस क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव भी पटना पश्चिम सीट से हारने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने एक बार फिर इस सीट को बिहार की सियासत के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ भाजपा के पास तीन दशक से ज्यादा पुराना चुनावी रिकॉर्ड है। वहीं, दूसरी ओर प्रशांत किशोर इसे नई राजनीतिक शुरुआत के तौर पर पेश कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि बांकीपुर की जनता पुराने राजनीतिक समीकरणों पर भरोसा जताती है या 1985 जैसे किसी नए राजनीतिक उलटफेर की कहानी लिखती है। चुनाव परिणाम ही बताएगा कि इस बार बांकीपुर का इतिहास किस दिशा में आगे बढ़ता है। यह आज शाम तक साफ हो जाएगा।










