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पीएम मोदी का मिशन पंजाब 2027 चुनाव का लॉन्च, दोआबा 32% दलित आबादी पर नजर, चंडीगढ़ में 2 करोड़ के टेंट में करेंगे रैली

On: July 16, 2026 2:57 AM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को 5 महीने बाद फिर पंजाब आ रहे हैं चंडीगढ़ में पीएम दोपहर करीब सवा 1:00 बजे आएंगे फिर यहां 2 करोड रुपए के AC टेंट में रैली करेंगे वह वहां 45 मिनट रुकने के बाद जालंधर जायेंगे जहाँ उनके चार कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

सरकारी एजेंडा में यह डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का उद्घाटन है लेकिन यह सिर्फ यही तक सीमित नहीं रहने वाला राजनैतिक हलचल को बढ़ाना भी इसकी वजह भी मानी जा रही है। पहले फरवरी में डेरा सचखंड बल्ला और अब जालंधर में जनसभा साफ है कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दलित लैंड दोआबा को लांच पैड बना रही है।

ऐसे समय जब कांग्रेस अंदरूनी खींचतान में जूझ रही है आम आदमी पार्टी सरकार विपक्ष के निशाने पर है और भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव की बीषाद बनाने में जुटी है वहां प्रधानमंत्री का यह दौरा कई राजनीतिक संकेत देता है।

आपको बता दें पीएम अभी पंजाब क्यों आ रहे हैं

प्रधानमंत्री के दौरा ऐसे समय हो रहा है जब चुनाव में 7 महीने का टाइम बचा है कांग्रेस हाईकमान अभी तक नेतृत्व और संगठन को लेकर कुछ क्लियर नहीं कर पा रही है वहीँ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश प्रधान राजा वडिंग दोनों गुट आमने-सामने है दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी सरकार कानून व्यवस्था, नशे उद्योगों के पलायन और वित्तीय स्थिति जैसे मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर है। वही पीएम मोदी और भाजपा इस राजनीतिक माहौल को अवसर के रूप में देख रही हैं।

पीएम दौरे के तीन बड़े राजनीतिक संदेश पहला डबल इंजन का नॉरेटिव मजबूत करने की कोशिश दूसरा, दोआबा के दलित वोट बैंक पर सीधा फॉक्स तीसरा, 2027 से पहले भाजपा खुद को सत्ता का दावेदार बताएगी।

जानिए प्रधानमंत्री बैक टू बैक चंडीगढ़ से जालंधर क्यों आ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पंजाब दौरे के लिए जालंधर को चुना है पहली नजर में यह अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर विकसित रेलवे स्टेशन के उद्घाटन का कार्यक्रम लगता है लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे चुनावी गणित भी है यही नहीं जालंधर केवल एक शहर नहीं बल्कि 23 सीटों वाले दोआबा की राजनीति का केंद्र है जिसमें जालंधर,होशियारपुर कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर नवांशहर वाला यह इलाका लंबे समय से पंजाब की चुनावी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता रहा है। आपको बता दें राज्य की करीब 32% अनुसूचित जाति आबादी में बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में रहता है कई विधानसभा सीटों पर दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं यही कारण है कि कांग्रेस,अकाली दल, आम आदमी पार्टी और अब भाजपा सभी की नजर दोआबा पर टिकी हुई है।

वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ शहरी या पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि पंजाब के नए सामाजिक समीकरणों में अपनी जगह बनाना चाहती है।

श्री संत रविदास एक्सप्रेस सिर्फ ट्रेन नहीं चुनावी संकेत भी माना जा रहा है

प्रधानमंत्री जालंधर से अमृतसर और वहाँ से वाराणसी जाने वाली नई श्री संत रविदास एक्सप्रेस को हरी जंडी दिखाएंगे सरकारी तौर पर इसका उद्देश्य धार्मिक और यात्री सुविधा बढ़ाना है लेकिन राजनीतिक रूप से इसका महत्व भी कम नहीं माना जा रहा। यही नहीं वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है जबकि संत रविदास का दोआबा और रविदासिया समाज में विशेष सम्मान है ऐसे में यह पहल भाजपा के लिए सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संदेश देने का माध्यम बन सकती है। आपको बताएं कि भाजपा को क्या राजनीतिक फायदा मिलने की उम्मीद है राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा इस दौरे से तीन स्तर पर लाभ लेने की कोशिश करेगी पहला विकास परियोजनाओं के जरिए यह बताना कि केंद्र सरकार पंजाब के इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार निवेश कर रही है। दूसरा दोआबा के दलित समाज और रविदास समुदाय के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना। तीसरा कांग्रेस की अंदरूनी कलेश और आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ माहौल का राजनितिक लाभ उठाना। हालांकि राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि सिर्फ प्रधानमंत्री का दौरा चुनावी सफलता की गारंटी नहीं हो सकता भाजपा को इसका लाभ तभी मिलेगा जब संगठन गांव और बूत स्तर तक इसे राजनीतिक समर्थन में बदल पाएंगे।

आईए जानते हैं एक्सपर्ट का क्या है कहना

राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ कृष्ण कुमार का कहना है कि 6 महीने में प्रधानमंत्री का दूसरा पंजाब दौरा इस बात का संकेत है कि भाजपा अब पंजाब को गंभीरता से ले रही है उनके मुताबिक पार्टी विकास, डेरा संपर्क और दलित वोट बैंक के सहारे अपना सामाजिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यही नहीं राजनीतिक विशेषज्ञ एक्सपर्ट नईम खान मानते हैं कि जालंधर का चयन सोची समझी रणनीति है उनका कहना है कि अगर प्रधानमंत्री उद्योग व्यापार, किसान, निवेश या रोजगार से जुड़ी कोई भी बड़ी घोषणा करते हैं तो उनका राजनीतिक असर सिर्फ दोआबा ही नहीं पूरे पंजाब में दिखाई दे सकता है।

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