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पोश एक्ट और लैंगिक हिंसा पर करवाया जागरूकता कार्यक्रम दस से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यालयों में पोश एक्ट के तहत नीति और कमेटी बनाना जरूरी: डा. रचना शर्मा

On: July 1, 2026 1:59 PM
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अमृतसर नगर निगम और लासर्न एंड टूब्रो कंपनी द्वारा लैंगिक हिंसा और पोश एक्ट पर एक जागरूकता कार्यक्रम करवाया गया। अमृतसर बल्क वाटर स्पलाई स्कीम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए करवाए गए कार्यक्रम में गुरू नानक देव युनिवर्सिटी के साईकॉलजी विभाग की मुखी प्रो. डा. रूपन ढिल्लों और सोशल विज्ञान विभाग से प्रो. डा. रचना शर्मा बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुई। इस मौको पर डा. रूपन ढिल्लों ने कहा कि पुरूष और औरतों का एक दूसरे के प्रति सवेंदनशील होना जरूरी है।

भारतीय समाज में औरतों को अधिकतर घरेलू कार्य करने तक ही समझा गया है। लेकिन अब हालात बदल रहें हैं फिर भी कई लोगों की सोच में वैसा बदलाव नही आया है, जिसकी प्रतक्रिया को हम कई बार लैंगिक हिंसा के तौर पर देखते है। उन्होंने कहा कि लैंगिक हिंसा सिर्फ घर तक ही सीमित नही है और अक्सर ऑफिसों में भी लैंगिक हिंसा के मामले देखने को मिलते है। उन्होंने कहा कि अगर हमारी नजर में कहीं भी लैंगिक हिंसा का कोई मामला नजर में आए तो उसे जरूर रिपोर्ट करना चाहिए।

वहीं पोश कानून के बारे में जानकारी देते हुए डा.रचना ने बताया कि कोई भी कर्मचारी चाहे वो पक्के हो या कच्चे, कांट्रेक्ट में हो या कोई इंर्टन हो या घरों में घरेलू काम करने वाली महिलाओं पर भी पोश कानून लागू होता है। पोश कानून के तहत यह नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है कि वो ऐसा माहौल बनाए की कार्यस्थल में किसी तरह का कोई यौन उत्पीड़न ना हो। कोई भी नियोक्ता जिसके यहां पर दस या दस से अधिक लोग काम करते हैं तो उन्हें यौन उत्पीड़न रोकने के लिए आंतरिक कमेटी का गठन करना, कर्मचारियों को पोश कानून के बारे में जागरूक करना जरूरी है तथा शिकायत मिलने पर शिकायतकर्ता के बारे में पूरी गोपनियता रखना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न होने की स्थिती में तीन महीनों के भीतर आंतरिक कमेटी को शिकायत दर्ज की जानी चाहिए और कमेटी द्वारा 90 दिनों के भीतर शिकायत की जांच पूरी की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि अगर कर्मचारी मानसिक और शारीरिक तौर पर शिकयात दर्ज कर पाने की स्थिती में नही है तो पीड़ित का रिशतेदार, दोस्त, सहकर्मचारी, राषट्रीय या राज्य महिला आयोग का कोई अधिकारी या कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसे घटना के बारे में जानकारी हो वह पीडित से लिखित में सहमती लेने के बाद आंतरिक कमेटी को शिकायत दे सकता है। उन्होंने साथ ही पुरूष कर्मचारियों को भी कार्यस्थल में महिलाओं के प्रति अपने व्यवहार में सावधानी बरतने में जोर दिया। इस मौके पर प्रंतीक सरकार, सौरभ ठाकुर, बनाप्रिया, नारायण सरकार, गायत्री चावड़ा, गौहर अहमद, अश्वनी कुमार आदि उपस्थित थे।

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