बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: बिहार विधान परिषद यानी एमएलसी के 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। इन सभी 10 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में कुल 10 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद गुरूवार यानी 11 जून को राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया है। इस बार एमएलसी चुनाव में एनडीए के 9 और राजद के एक मात्र प्रत्याशी डॉ.सुनील कुमार सिंह ने जीत दर्ज की है। इस चुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा जद(यू.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते मंत्री पुत्र निशांत कुमार की रही है। बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री की कुर्सी पर विराजमान निशांत कुमार पहली बार बिहार विधान परिषद पहुंचे हैं। उनके अलावा जद(यू.) की ओर से ही शिवानी देवी प्रजापति, भारती मेहता और ललन प्रसाद भी निर्वाचित हुए हैं। भाजपा की ओर से लोक गायक से भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार बने पवन सिंह ने भी पहली बार जीत दर्ज की है। उनके साथ भाजपा के संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर व शीला पंडित भी बिहार विधान परिषद पहुंचे हैं। लोजपा (रामविलास) से अशरफ अंसारी और राजद से डॉ.सुनील कुमार सिंह भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। नवनिर्वाचित सदस्यों में से 8 पहली बार बिहार विधान परिषद पहुंचे हैं। जबकि, भाजपा के संजय मयूख और राजद के डॉ.सुनील सिंह दूसरी बार उच्च सदन के सदस्य बने हैं। सभी निर्वाचित सदस्य बिहार विधान परिषद पहुंचकर अपना-अपना सर्टिफिकेट प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, फिल्म स्टार से नेता बने पवन सिंह अभी लखनऊ में हैं। उनकी जगह उनके भाई रितिक सिंह सर्टिफिकेट लेने पहुंचे थे। बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव होना था। कुल 10 सीटों के लिए सिर्फ 10 प्रत्याशियों ने ही अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन पत्रों की जांच में सभी 10 प्रत्याशियों के पर्चे वैध पाए गए। इसके बाद चुनाव मैदान में प्रत्याशियों की संख्या और सीटों की संख्या बराबर होने से मतदान की दरकार नहीं पड़ी। इस बार एमएलसी चुनाव में सत्ता पक्ष भाजपा-जद(यू.) को 4-4 और लोजपा (रामविलास) को 1 सीटें मिली हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी राजद के खाते में 1 सीट गई है। इस तरह एनडीए ने कुल 9 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि, महागठबंधन को एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा है। उधर, चुनाव परिणाम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी रालोमो सुप्रीमो व राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री पुत्र दीपक प्रकाश इस बार एमएलसी नहीं बन सके। उन्हें एनडीए की ओर से प्रत्याशी नहीं बनाया गया था। ऐसे में अब उनके मंत्री पद को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य बने ही दो बार बिहार की एनडए सरकार में मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। हाल ही में नई सम्राट सरकार के गठन के बाद भी उन्हें पंचायती राज मंत्री बनाया गया है। अब तय समय 6 महीने के अंदर किसी सदन की सदस्यता नहीं मिलने की स्थिति में उनके मंत्री पद पर संकट गहरा सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चायें तेज हो गई हैं। बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे सिर्फ 10 सीटों तक सीमित नहीं हैं। इन परिणामों ने यह भी दिखाया कि बिहार की राजनीति में एनडीए का संगठनात्मक और संख्यात्मक प्रभाव अभी मजबूत बना हुआ है। वहीं, विपक्षी महागठबंधन के सामने आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए अपनी रणनीति और धार दोनों को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। निर्विरोध चुनाव और एनडीए की बड़ी जीत ने बिहार की सियासत में नए राजनीतिक संकेत दे दिए हैं, जिनकी गूंज आने वाले दिनों में भी सुनाई दे सकती है।
बिहार विधान परिषद चुनाव में सभी 10 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित, निशांत कुमार व पवन सिंह पहली बार पहुंचे उच्च सदन










